तेंदूखेड़ा रिश्वतकांड,30 हजार रुपये की रिश्वत का मामला अब एसडीएम पूजा सोनी तक,यूपीएससी चयन के बीच राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा।
स्टेनो की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा,एसडीएम की भूमिका को लेकर उठे सवाल; ईओडब्ल्यू कर रही मामले की जांच,अभी किसी भी अधिकारी की संलिप्तता आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं।
तेंदूखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा स्थित एसडीएम कार्यालय में 30 हजार रुपये के कथित रिश्वत प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा कार्यालय में पदस्थ स्टेनो को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ा है। जांच के दौरान सामने आए कुछ तथ्यों और कथित बयानों के आधार पर तत्कालीन एसडीएम पूजा सोनी का नाम भी चर्चा में आया है। हालांकि, अब तक किसी भी जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ दोष सिद्ध होने या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
यह मामला इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि हाल ही में पूजा सोनी का संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में चयन हुआ है। एक ओर उनकी सफलता की चर्चा पूरे देश में हो रही थी, वहीं दूसरी ओर तेंदूखेड़ा रिश्वत प्रकरण में उनका नाम सामने आने से यह मामला प्रदेश की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, ईओडब्ल्यू ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय में पदस्थ स्टेनो को 30 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। यह राशि एक राजस्व संबंधी प्रकरण में कार्य कराने के बदले मांगी गई बताई गई है। कार्रवाई के दौरान सामने आए कथित तथ्यों के आधार पर यह भी जांच की जा रही है कि क्या रिश्वत की राशि किसी अन्य अधिकारी तक पहुंचाई जानी थी या नहीं।
फिलहाल ईओडब्ल्यू पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में किसकी क्या भूमिका रही।
कानूनी दृष्टि से यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अभी तक एसडीएम पूजा सोनी के विरुद्ध किसी भी न्यायालय ने कोई दोष सिद्ध नहीं किया है और न ही जांच एजेंसी ने उन्हें आरोपी घोषित किए जाने संबंधी कोई अंतिम आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की है। ऐसे में जांच पूरी होने और सक्षम न्यायालय के निर्णय से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब ईओडब्ल्यू की जांच और उसके अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि रिश्वत प्रकरण में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।

