मध्य प्रदेश में अल नीनो का असर,जबलपुर में सूखे के गंभीर संकेत,मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी,बारिश के लिए मंदिरों में पहुंचे जनप्रतिनिधि।

 मध्य प्रदेश में अल नीनो का असर,जबलपुर में सूखे के गंभीर संकेत,मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी,बारिश के लिए मंदिरों में पहुंचे जनप्रतिनिधि।

जुलाई-अगस्त में सामान्य से कम वर्षा की आशंका,किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह,बरगी बांध में जलस्तर ऐतिहासिक रूप से नीचे,शहर के कई इलाकों में पेयजल संकट गहराया।

जबलपुर,ग्रामीण खबर MP।

मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून की धीमी शुरुआत और अल नीनो के प्रभाव ने सूखे की आशंकाओं को और गहरा दिया है। जबलपुर में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। एक ओर मौसम वैज्ञानिकों ने पूरे वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई है, वहीं दूसरी ओर जिले के प्रमुख जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं। बरगी बांध, परियट जलाशय और खनदारी जलाशय में जलस्तर लगातार घटने से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट गहरा गया है। कई स्थानों पर पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो चुकी है, जबकि किसानों के सामने खरीफ फसल की बुवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक मनीष भान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वर्ष 2026 सूखे का वर्ष साबित हो सकता है। उनके अनुसार अल नीनो के प्रभाव के कारण जुलाई और अगस्त में भी सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे ऐसी फसलों का चयन करें जिनमें पानी की आवश्यकता कम होती है, ताकि संभावित सूखे की स्थिति में नुकसान कम हो सके।

जबलपुर में मौसम का अध्ययन करने वाले दो प्रमुख संस्थान कार्यरत हैं। एक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का क्षेत्रीय कार्यालय तथा दूसरा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय का मौसम विज्ञान केंद्र। दोनों संस्थानों द्वारा मानसून की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी कुछ सप्ताह में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो कृषि उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

पिछले दस वर्षों के जून माह के वर्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 382.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि 2024 में 104.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वर्ष 2022 में 111 मिलीमीटर, 2021 में 47.2 मिलीमीटर, 2020 में 66.8 मिलीमीटर, 2019 में मात्र 15.5 मिलीमीटर, 2018 में 58.2 मिलीमीटर, 2017 में 130.1 मिलीमीटर, 2016 में 93 मिलीमीटर तथा 2015 में 49.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। इस वर्ष अब तक लगभग 46 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य से काफी कम मानी जा रही है।

कम वर्षा का सबसे बड़ा असर जिले के प्रमुख जल स्रोतों पर दिखाई दे रहा है। बरगी बांध, जो जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए सिंचाई एवं पेयजल का प्रमुख आधार है, इस समय लगभग खाली होने की स्थिति में पहुंच गया है। सामान्य परिस्थितियों में जहां बांध में लगभग 21 मीटर तक जल उपलब्ध रहता था, वहीं इस समय केवल लगभग 4 मीटर पानी शेष बताया जा रहा है। यह जल सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं है और नर्मदा नदी की सतत धारा बनाए रखने के लिए भी इसे छोड़ा नहीं जा रहा है। इसके कारण नर्मदा नदी के कई हिस्सों में जल प्रवाह काफी कम हो गया है।

बरगी बांध के दाएं तट की मुख्य नहर, जिससे आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई एवं जलापूर्ति होती थी, लगभग पूरी तरह सूख चुकी है। नहर में पानी करीब 100 फीट पीछे चला गया है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत सेहतपुरी के किसान शेख मजीद का कहना है कि नहर में पानी नहीं होने के कारण वे इस बार धान की रोपाई शुरू नहीं कर पाए हैं। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो खेती प्रभावित होना तय है।

शहर में भी जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। जबलपुर की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से नर्मदा नदी, परियट जलाशय और खनदारी जलाशय पर निर्भर है। तीनों स्रोतों में जल की कमी के कारण नगर निगम को कई क्षेत्रों में जलापूर्ति सीमित करनी पड़ी है। पूर्व विधानसभा और कैंट विधानसभा क्षेत्र के अनेक इलाकों में केवल एक बार लगभग दस मिनट के लिए पानी की आपूर्ति की जा रही है।

पानी की समस्या को लेकर नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। नगर कांग्रेस के नेतृत्व में कई स्थानों पर मटका फोड़ प्रदर्शन और नगर निगम कार्यालय का घेराव किया गया। नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने आरोप लगाया कि नगर निगम पेयजल व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहा है और नागरिकों को पीने का पानी तक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

उधर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जल संकट असाधारण परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुआ है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कहा कि सभी प्रमुख जल स्रोतों में पानी की कमी आ गई है, जिससे पूरे शहर की जलापूर्ति प्रभावित हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए नगर निगम के लगभग 40 टैंकरों के साथ फायर ब्रिगेड एवं उद्यान विभाग के टैंकरों की भी सहायता ली जा रही है।

जल संकट के बीच अच्छी वर्षा की कामना को लेकर जनप्रतिनिधि धार्मिक आयोजनों का भी सहारा ले रहे हैं। नगर निगम प्रशासन द्वारा विशेष पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और जबलपुर कैंट विधानसभा के विधायक अशोक रोहाणी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने इंद्रदेव से समय पर अच्छी वर्षा की प्रार्थना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो न केवल पेयजल संकट और गहराएगा, बल्कि खरीफ सीजन की खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा जल संसाधनों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में किसानों, प्रशासन और आम नागरिकों को जल संरक्षण तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता होगी।

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