रीठी के ग्राम खम्हरिया में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,राजा परीक्षित प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु।

 रीठी के ग्राम खम्हरिया में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,राजा परीक्षित प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु।

कथा व्यास श्री दयाशंकर उपाध्याय ने कहा-“जीव मात्र का कल्याण केवल भगवत भजन से संभव”ज्ञान,भक्ति और वैराग्य का महत्व बताया।

रीठी,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले के रीठी विकासखंड अंतर्गत ग्राम खम्हरिया नंबर-1 में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा श्रोता राममिलन यादव के निवास पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण कर भाव-विभोर हुए।

कथा व्यास श्री दयाशंकर जी उपाध्याय ने अपनी मधुर एवं ओजस्वी वाणी से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए राजा परीक्षित, व्यास-नारद संवाद, कुंती चरित्र, विदुर-मैत्री प्रसंग तथा ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कथा व्यास ने कहा कि यदि जीवन जीने की कला सीखनी हो तो श्रीरामायण से सीखना चाहिए और मृत्यु को समझना हो तो श्रीमद्भगवद्गीता से बड़ा कोई मार्गदर्शक नहीं है। उन्होंने त्रिवेणी संगम का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार गंगा और यमुना दिखाई देती हैं लेकिन सरस्वती अदृश्य रहती हैं, उसी प्रकार गीता में विज्ञान और वैराग्य तो सहज दिखाई देते हैं, लेकिन भक्ति को अनुभव करने के लिए पूर्ण समर्पण और आत्मलीनता आवश्यक होती है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य की वाणी उसके व्यक्तित्व का परिचय होती है। इसलिए सदैव मधुर और मीठा बोलना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने कौवे और कोयल का उदाहरण देते हुए कहा कि कौवा दिनभर शोर करता है लेकिन कोई ध्यान नहीं देता, जबकि कोयल की मधुर वाणी सभी को आकर्षित करती है। इसलिए मनुष्य को अपने व्यवहार और वाणी में मधुरता लानी चाहिए।

कथा व्यास श्री उपाध्याय ने कहा कि जीव मात्र का वास्तविक कल्याण भगवत भजन से ही संभव है। मानव जीवन प्रभु भक्ति के लिए मिला है और जो व्यक्ति प्रभु का स्मरण एवं भजन नहीं करता, उसका जीवन पशु समान माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में धर्म, भक्ति और सदाचार अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में रामभगत यादव, उदयभान यादव, मानसिंह ठाकुर, श्यामसुंदर विश्वकर्मा, भगवानदास यादव, दशरथ यादव, राजाराम यादव, मुन्ना यादव, शरद यादव, कैलाश यादव, मस्तराम यादव, लखन यादव, प्रकाश यादव सहित सैकड़ों ग्रामवासी उपस्थित रहे। कथा स्थल पर पूरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।



Post a Comment

Previous Post Next Post