सनातन धर्म पर टिप्पणी के बाद विधायक संजय पाठक ने उदयनिधि स्टालिन को भेजी रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता।

 सनातन धर्म पर टिप्पणी के बाद विधायक संजय पाठक ने उदयनिधि स्टालिन को भेजी रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता।

विधायक बोले-सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं,बल्कि वैज्ञानिक,दार्शनिक और मानवीय जीवन मूल्यों पर आधारित संस्कृति है।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

तमिलनाडु के डीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के पुत्र उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को लेकर दिए गए विवादित बयानों के बाद अब मध्यप्रदेश के कटनी जिले से एक अलग और प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक ने उदयनिधि स्टालिन को सनातन धर्म के मूल स्वरूप और उसके दार्शनिक पक्ष को समझाने के उद्देश्य से ‘रामायण’ और ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ की प्रतियां भेजी हैं। विधायक ने यह पहल अपने पूर्व में किए गए सार्वजनिक संकल्प के अनुरूप की है।

जानकारी के अनुसार, उदयनिधि स्टालिन ने हाल ही में अपने एक बयान में सनातन धर्म को समाप्त करने की बात कही थी। इससे पहले भी वह सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों से कर चुके हैं। उनके इन बयानों को लेकर देशभर में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। मध्यप्रदेश में भी इस विषय को लेकर कई स्थानों पर आक्रोश व्यक्त किया गया।

इसी क्रम में विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक ने कटनी पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती पत्र सौंपते हुए उदयनिधि स्टालिन के बयान को आपत्तिजनक, भड़काऊ और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया था। उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि किसी भी धर्म, संस्कृति या परंपरा के प्रति इस प्रकार की टिप्पणी भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है तथा इससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

विधायक संजय पाठक द्वारा सौंपे गए इस शिकायती पत्र को नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक, ब्राह्मण समाज अध्यक्ष राजू शर्मा सहित कटनी जिले के अनेक सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का समर्थन भी प्राप्त हुआ। इस दौरान विधायक ने कहा था कि यदि उदयनिधि स्टालिन वास्तव में सनातन धर्म को समझना चाहते हैं तो उन्हें उसके मूल ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि बिना अध्ययन और समझ के किसी भी संस्कृति या परंपरा पर टिप्पणी करना उचित नहीं कहा जा सकता।

अपने इसी कथन को अमल में लाते हुए विधायक संजय पाठक ने अमेज़न इंडिया ऑनलाइन स्टोर के माध्यम से ‘रामायण’ और ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ की एक-एक प्रति उदयनिधि स्टालिन के निवास पते पर प्रेषित कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने एक विस्तृत पत्र भी भेजा है, जिसमें सनातन धर्म के व्यापक स्वरूप और उसकी सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख किया गया है।

अपने संदेश में विधायक संजय पाठक ने लिखा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित कोई पद्धति नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को संतुलित, अनुशासित और मूल्यवान बनाने वाली वैज्ञानिक एवं दार्शनिक जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का आधार मानवता, करुणा, सहिष्णुता, सत्य, सेवा और कर्तव्य जैसे मूल सिद्धांतों पर टिका हुआ है। यह धर्म विश्व कल्याण और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को बढ़ावा देता है।

विधायक ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ‘रामायण’ केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला महाकाव्य है। वहीं ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ मानव जीवन के संकट, कर्तव्य, कर्म, धर्म और आध्यात्मिक चिंतन का गहन दर्शन प्रस्तुत करती है। उन्होंने लिखा कि इन ग्रंथों में मानव जीवन के हर पहलू का समाधान और नैतिक मार्गदर्शन मौजूद है।

संजय पाठक ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत की सनातन परंपरा हजारों वर्षों से विश्व को ज्ञान, अध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना प्रदान करती आई है। उन्होंने लिखा कि किसी भी विषय पर टिप्पणी करने से पहले उसके इतिहास, दर्शन और मूल भाव को समझना आवश्यक होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन ग्रंथों के अध्ययन से उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म की वास्तविक अवधारणा और उसके मानवीय स्वरूप को समझ पाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले सहित प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर जहां भाजपा और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने विधायक संजय पाठक की इस पहल का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी लोगों द्वारा इस कदम को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सनातन धर्म को लेकर पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। ऐसे में विधायक संजय पाठक द्वारा विरोध के स्थान पर वैचारिक और सांस्कृतिक संवाद का रास्ता अपनाना एक अलग संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे भारतीय परंपरा के अनुरूप ज्ञान और संवाद के माध्यम से जवाब देने की पहल बताया है।

कटनी जिले में भी इस विषय को लेकर लोगों के बीच चर्चाओं का दौर जारी है। धार्मिक संगठनों का कहना है कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानव समाज के लिए जीवन मूल्यों का संदेश देता है। लोगों का मानना है कि धर्म और संस्कृति जैसे संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करते समय सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को संयम और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

वहीं विधायक संजय पाठक के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल विरोध दर्ज कराने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सनातन धर्म के मूल स्वरूप को समझाने के लिए सकारात्मक पहल की है। उनका कहना है कि समाज में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद और ज्ञान के माध्यम से ही किसी भी भ्रम को दूर किया जा सकता है।

फिलहाल विधायक संजय पाठक द्वारा उदयनिधि स्टालिन को भेजी गई ‘रामायण’ और ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ को लेकर यह मामला राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।



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