भाजपा सांसद वीडी शर्मा की पत्नी का अपनी ही सरकार पर तीखा तंज,“वो दिन दूर नहीं जब EMI पर मिलेगा पेट्रोल-डीजल”।

 भाजपा सांसद वीडी शर्मा की पत्नी का अपनी ही सरकार पर तीखा तंज,“वो दिन दूर नहीं जब EMI पर मिलेगा पेट्रोल-डीजल”।

महंगाई और लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों पर डॉ. स्तुति मिश्रा की फेसबुक पोस्ट से सियासी हलचल तेज,सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों पर उठे सवाल।

जबलपुर,ग्रामीण खबर MP।

मध्यप्रदेश की राजनीति में उस समय नई बहस छिड़ गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और खजुराहो लोकसभा सीट से सांसद वीडी शर्मा की पत्नी डॉ. स्तुति मिश्रा ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर अपनी ही सरकार पर तीखा व्यंग्य कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर की गई उनकी एक टिप्पणी अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गई है। आम जनता पहले से महंगाई और ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान है, ऐसे में सत्ता पक्ष से जुड़े परिवार की ओर से आया यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डॉ. स्तुति मिश्रा ने शनिवार सुबह फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “वो दिन दूर नहीं जब बैंक होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की तरह पेट्रोल-डीजल भी EMI पर उपलब्ध कराएंगे।” उनकी यह टिप्पणी कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। लोगों ने इसे महंगाई के खिलाफ आम जनता की भावना की अभिव्यक्ति बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।

दरअसल, देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पेट्रोलियम कंपनियों ने नौ दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। शनिवार को पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यप्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर से अधिक बिक रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई से लेकर परिवहन और व्यापार तक हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। महंगाई की मार झेल रही जनता के बीच डॉ. स्तुति मिश्रा की पोस्ट को लोगों ने अपनी भावनाओं की आवाज बताया।

सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने कहा कि अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। कुछ लोगों ने सरकार की टैक्स नीति पर सवाल उठाए, तो कुछ ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की दरों के बीच अंतर को लेकर नाराजगी जताई।

यूजर रामकृष्ण मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि जब युवा और शिक्षित वर्ग अपनी तकलीफ को व्यंग्य और सटायर के जरिए व्यक्त करने लगे, तो यह केवल राजनीति नहीं बल्कि व्यवस्था और संवाद की विफलता का संकेत होता है। वहीं भाजपा नेता राहुल सिंह राठौड़ ने भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोविड काल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम ऊंचे बने रहे। उन्होंने विभिन्न राज्यों में पेट्रोल की अलग-अलग कीमतों का जिक्र करते हुए टैक्स संरचना और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बढ़ती महंगाई को लेकर समाज के हर वर्ग में फैल रही बेचैनी को भी दर्शाता है। खास बात यह है कि यह टिप्पणी किसी विपक्षी नेता की ओर से नहीं बल्कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े परिवार की ओर से आई है। इससे विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का नया अवसर मिल सकता है।

प्रदेश में पहले से ही बेरोजगारी, महंगाई, बढ़ती गैस कीमतें और आवश्यक वस्तुओं के दाम राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सत्ता पक्ष के भीतर से उठी आवाज को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस पोस्ट को लेकर भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब भाजपा नेताओं के परिवार तक महंगाई से परेशान होकर सवाल उठाने लगे हैं, तो यह सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता को दर्शाता है।

डॉ. स्तुति मिश्रा पेशे से शिक्षाविद हैं और जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। वे सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए जानी जाती हैं। जबलपुर में कई सामाजिक और रचनात्मक गतिविधियों में उनकी उपस्थिति लगातार देखी जाती रही है। सोशल मीडिया पर भी वे समय-समय पर समाज और आमजन से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखती रही हैं। हालांकि वे राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं मानी जातीं, लेकिन उनकी इस पोस्ट ने सीधे राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

भाजपा संगठन या सांसद वीडी शर्मा की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है। बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर जनता में पहले से असंतोष है, ऐसे में सत्ता पक्ष के भीतर से आया यह व्यंग्य सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है। यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन जाती हैं।

प्रदेश में आगामी समय में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों के बीच यह मामला भाजपा के लिए नई चुनौती बन सकता है। जनता के बीच महंगाई को लेकर बढ़ती नाराजगी को विपक्ष राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा, वहीं भाजपा के लिए इस तरह के बयानों पर संतुलन बनाना भी आसान नहीं होगा।

फिलहाल डॉ. स्तुति मिश्रा की एक फेसबुक पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि महंगाई का मुद्दा अब केवल विपक्ष के आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के बीच भी सुनाई देने लगी है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह व्यंग्य अब प्रदेश की राजनीति में बड़े विमर्श का विषय बन चुका है।



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