गंगा दशहरा पर ग्राम खम्हरिया नं.1 में जल संरक्षण का संदेश,जल स्त्रोत व कलश पूजन के साथ ग्रामवासियों ने लिया संकल्प।
जनअभियान परिषद के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में जल गंगा संवर्धन अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का किया गया प्रयास,परामर्शदाता शरद यादव ने दिलाई जल संरक्षण की शपथ।
रीठी,ग्रामीण खबर MP।
गंगा दशहरा पर्व के पावन अवसर पर ग्राम खम्हरिया नं.1 में धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आह्वान पर प्रदेशभर में संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति एवं ग्रामवासियों के सहयोग से जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक डॉ. तेजसिंह केसवाल के निर्देशन में सम्पन्न हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए जल बचाने और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम के प्रमुख जल स्रोतों के पूजन एवं कलश पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात ग्रामवासियों ने वृक्ष पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। ग्राम स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरे वातावरण में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। ग्राम खम्हरिया के पूर्व सरपंच गजराज यादव ने श्रीफल भेंट कर तथा तिलक वंदन के माध्यम से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर गजराज यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश उपस्थित ग्रामीणों को सुनाया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का मूल आधार है और वर्तमान समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि गंगा दशहरा का पर्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं, जिससे संपूर्ण मानव जीवन, प्रकृति और पृथ्वी धन्य हुई थी। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा गंगा दशहरा पर्व को “जल गंगा संवर्धन अभियान” से जोड़ा गया है ताकि जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।
कार्यक्रम में सामूहिक रूप से गंगा जी की आरती एवं भगवान शिव की आरती की गई। ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ आरती में भाग लेकर जल और प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जल संकट आज पूरे विश्व के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुका है। यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रति समाज जागरूक नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को भीषण संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह जल बचाने के लिए छोटे-छोटे प्रयासों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्फुटन समिति एवं समाजसेवियों द्वारा जल स्रोतों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन, जल के समुचित उपयोग, तालाबों एवं कुओं की स्वच्छता बनाए रखने तथा जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। दीवार लेखन एवं जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण का संदेश दिया गया। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि यदि गांव स्तर पर सामूहिक प्रयास किए जाएं तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम में बंद पड़े पुराने बोरवेल एवं ट्यूबवेल के पास रिचार्ज पिट निर्माण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि रिचार्ज पिट निर्माण से वर्षा जल सीधे भूजल स्तर तक पहुंचता है, जिससे भूजल संरक्षण में सहायता मिलती है और भविष्य में जल संकट की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके साथ ही घाटों एवं जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने का भी संदेश दिया गया।
परामर्शदाता शरद यादव ने उपस्थित ग्रामवासियों को जल संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है और यदि आज जल स्रोतों को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले समय में गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों और खेतों में जल संरक्षण के उपाय अपनाएं तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने वर्षा जल संचयन, पौधारोपण और जल स्रोतों की नियमित सफाई को ग्राम स्तर पर अभियान के रूप में चलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। लोगों ने कहा कि गांव में जल स्रोतों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से निरंतर कार्य किया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी विश्वास जताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान गजराज यादव, रामभगत यादव, प्रहलाद यादव, बिरजू यादव, अशोक यादव, निर्भय यादव, सतीश यादव, लाल कुमार, अतुल यादव, कन्हैया यादव, दिनेश यादव, रणजीत यादव, अजय यादव, प्रदीप यादव, दिवांश, अंकित यादव, छोटू यादव, प्रांशु यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में ग्रामीणों का उत्साह और सहभागिता उल्लेखनीय रही तथा जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता और प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

