महनेर में नल-जल योजना पर गंभीर सवाल,मानकों से खिलवाड़ के आरोपों ने बढ़ाई चिंता।

 महनेर में नल-जल योजना पर गंभीर सवाल,मानकों से खिलवाड़ के आरोपों ने बढ़ाई चिंता।

एक मीटर के बजाय उथली खुदाई,छह इंच की जगह पतली सीसी ढलाई का दावा,सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद उच्च स्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग तेज।

उमरिया पान,ग्रामीण खबर MP।

ग्राम महनेर में संचालित नल-जल योजना के कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीन कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किए जाने की बात ग्रामीणों द्वारा उठाई जा रही है। आरोप है कि विभागीय इंजीनियर और एसडीओ की कथित मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए कार्य कराया जा रहा है। मामले ने गांव में व्यापक असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना का उद्देश्य प्रत्येक घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को दूरस्थ जलस्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े। किंतु महनेर में इस योजना की प्रगति और गुणवत्ता दोनों ही प्रश्नों के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि योजना का कार्य वर्ष 2024 में पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी कई हिस्सों में काम अधूरा है। कुछ मोहल्लों में पाइपलाइन अधूरी पड़ी है तो कई स्थानों पर अब तक कनेक्शन नहीं दिए गए हैं।

सबसे गंभीर आरोप पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई को लेकर हैं। ग्रामीणों के अनुसार नियमानुसार लगभग एक मीटर गहराई तक खुदाई की जानी चाहिए थी, जिससे पाइपलाइन सुरक्षित रहे और भविष्य में किसी प्रकार की क्षति की संभावना कम हो। लेकिन मौके पर मात्र लगभग एक फीट गहराई तक ही नाली खोदकर पाइप डाल दिए जाने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की उथली खुदाई से हल्के दबाव, वाहन आवागमन या बरसात के दौरान मिट्टी खिसकने से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे जल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहेगा।

पाइपलाइन डालने के बाद किए जा रहे सीसी मरम्मत कार्य को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जहां छह इंच मोटाई में सीसी ढलाई किया जाना अनिवार्य है, वहां केवल एक से दो इंच मोटाई में ही ढलाई की जा रही है। कई स्थानों पर सीमेंट और रेत के अनुपात को भी मानक के अनुरूप नहीं बताया जा रहा। परिणामस्वरूप सड़क की सतह असमान हो गई है और कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि आगामी बरसात में यह सीसी परत तेजी से उखड़ सकती है, जिससे सड़क और पाइपलाइन दोनों को नुकसान पहुंचेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में संबंधित एसडीओ को दो से तीन बार दूरभाष पर शिकायत की गई, किंतु अब तक न तो कोई प्रभावी निरीक्षण हुआ और न ही तकनीकी जांच कराई गई। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि विभागीय स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

ग्राम निवासी सोमनाथ पटेल ने मामले को गंभीर मानते हुए सीएम हेल्पलाइन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, थर्ड पार्टी निरीक्षण तथा उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण की मांग की गई है। साथ ही यदि कार्य में लापरवाही या भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो ठेकेदार अभिषेक श्रीवास्तव और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं में यदि इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आती हैं तो आमजन का विश्वास कमजोर होता है। नल-जल योजना जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में गुणवत्ता से समझौता न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि ग्रामीणों के मूल अधिकारों की भी अनदेखी है।

गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने संयुक्त रूप से प्रशासन से उच्च स्तरीय तकनीकी टीम गठित कर मौके पर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पाइपलाइन की वास्तविक गहराई, सीसी ढलाई की मोटाई और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। जहां भी मानकों से कम कार्य पाया जाए, उसे दोबारा निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से मिलकर आगे की रणनीति बनाएंगे। उनका कहना है कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि केवल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि गांव में स्थायी, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित हो।

अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। क्या निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी या मामला अन्य शिकायतों की तरह फाइलों तक सीमित रह जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा। महनेर का यह प्रकरण केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई होगी, जिससे योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।

ग्रामीण खबर MP-
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