दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले इंदौर सट्टा बाजार की भविष्यवाणी ने बढ़ाई सियासी हलचल,भाजपा को बढ़त का दावा।
3 अगस्त को आने वाले परिणामों से पहले सट्टा बाजार में दांव तेज,भाजपा का भाव कम और कांग्रेस का अधिक बताया जा रहा,राजनीतिक विश्लेषकों का कहना-अंतिम फैसला जनता के मतों की गिनती से ही होगा।
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम घोषित होने में अब कुछ ही समय शेष है। ऐसे में पूरे मध्य प्रदेश की राजनीतिक निगाहें 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं। यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी कांग्रेस की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाओं का दौर जारी है और इसी बीच इंदौर का चर्चित सट्टा बाजार भी सक्रिय हो गया है, जिसकी चर्चाएं पूरे प्रदेश में तेज हो गई हैं।
प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से इंदौर का सट्टा बाजार चुनावी परिणामों को लेकर सुर्खियों में रहता आया है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान यहां लगाए जाने वाले भावों पर राजनीतिक दलों के समर्थकों से लेकर आम लोगों तक की नजर रहती है। हालांकि सट्टा बाजार किसी भी प्रकार का आधिकारिक या वैज्ञानिक आकलन नहीं होता, फिर भी इसे लेकर चर्चाएं हमेशा होती रही हैं।
दतिया उपचुनाव के संबंध में सामने आ रही जानकारियों के अनुसार सट्टा बाजार में भाजपा को कांग्रेस की तुलना में बढ़त मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि भाजपा की जीत का भाव लगभग 75 पैसे जबकि कांग्रेस का भाव 1.25 रुपये के आसपास चल रहा है। सट्टा बाजार की परंपरागत भाषा में कम भाव वाले उम्मीदवार या दल की जीत की संभावना अधिक मानी जाती है। इसी आधार पर भाजपा को हल्की बढ़त मिलने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि बाजार से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं है और दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव के दौरान प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर हुई कई महत्वपूर्ण घटनाओं का भी मतदाताओं पर प्रभाव पड़ सकता है। चुनाव प्रचार और मतदान के बीच किसान आंदोलन, विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर हुए प्रदर्शन तथा राष्ट्रीय स्तर पर सामने आए राजनीतिक घटनाक्रमों की लगातार चर्चा रही। इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनने का दावा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव परिणाम केवल राजनीतिक दावों या सट्टा बाजार के आकलन से तय नहीं होते, बल्कि अंतिम निर्णय मतदाताओं द्वारा डाले गए मतों की गणना के बाद ही सामने आता है। कई बार सट्टा बाजार के अनुमान सही साबित हुए हैं तो कई अवसरों पर ये पूरी तरह गलत भी सिद्ध हुए हैं। इसलिए ऐसे अनुमानों को केवल चर्चाओं और संभावनाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दतिया विधानसभा उपचुनाव को प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंकी है और परिणामों को आगामी राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेशभर के राजनीतिक कार्यकर्ता, विश्लेषक और आम नागरिक 3 अगस्त को होने वाली मतगणना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल चुनाव परिणामों से पहले सट्टा बाजार की भविष्यवाणियों ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन वास्तविक तस्वीर मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का फैसला ही अंतिम और सर्वोपरि होता है। इसलिए सभी दावों, अनुमानों और चर्चाओं के बीच अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक परिणामों से ही माना जाएगा।
अस्वीकरण: ग्रामीण खबर MP सट्टा बाजार या उसकी भविष्यवाणियों का समर्थन अथवा प्रमाणीकरण नहीं करता। सट्टा बाजार के भाव केवल बाजार में चल रही चर्चाओं और दावों पर आधारित होते हैं। चुनाव का वास्तविक परिणाम केवल निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक मतगणना के बाद ही मान्य होगा।


