समाधान से पहले ही बंद हुई सीएम हेल्पलाइन,स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कछार गांव बड़ा की अनियमितताओं की शिकायत करने वाले युवक ने लगाया आरोप,कहा-कार्रवाई के बजाय शिकायत ही कर दी बंद,जवाबदेही पर उठे सवाल।
सिलौंडी। प्रदेश सरकार द्वारा आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के लिए संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन व्यवस्था पर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी शिकायत का निराकरण किए बिना ही उसे बंद कर दिया गया। मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कछार गांव बड़ा से जुड़ा है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थी।
जानकारी के अनुसार इटौली निवासी पिंटू तिवारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कछार गांव बड़ा में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत क्रमांक 39616846 दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र पर पदस्थ एएनएम निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं रहती हैं, जिससे ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं मिल पातीं। इसके अलावा उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्ड में मरीजों के लिए लगाए गए बेड पर कुत्ते के सोने का वीडियो भी शिकायत के साथ उपलब्ध कराया था, ताकि वास्तविक स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में आ सके।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारियों ने बिना किसी ठोस समाधान के ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत को बंद कर दिया। उनका कहना है कि न तो उन्हें किसी प्रकार की संतोषजनक जानकारी दी गई और न ही शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।
पिंटू तिवारी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरिया पान तथा जिला स्वास्थ्य विभाग कटनी के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि शिकायतों का इसी प्रकार बिना निराकरण के समापन किया जाता रहा तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी जनहितकारी व्यवस्था का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के बजाय केवल शिकायत बंद कर देना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में समय पर स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होंगे और अस्पताल परिसर की साफ-सफाई तथा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी नहीं होगी तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, न कि बिना कार्रवाई के शिकायतों का समापन करना। उन्होंने शासन से मांग की है कि शिकायत क्रमांक 39616846 की पुनः समीक्षा कर स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।
हालांकि इस मामले में संबंधित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


