वीरांगना रानी दुर्गावती महाविद्यालय बहोरीबंद में छत पर बागवानी एवं वर्टिकल गार्डनिंग का तकनीकी प्रशिक्षण संपन्न।
व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों को जीरो बजट फार्मिंग,रूफटॉप गार्डन और कम लागत कृषि तकनीकों की दी गई व्यवहारिक जानकारी।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों को छत पर बागवानी एवं वर्टिकल गार्डनिंग का तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉ. इंद्र कुमार के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. श्रीमती मंजू द्विवेदी के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण जैविक कृषि विशेषज्ञ राम सुख दुबे द्वारा दिया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने की दिशा में व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा। कम लागत तकनीक और जीरो बजट फार्मिंग की अवधारणा के अंतर्गत विद्यार्थियों को बताया गया कि सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन संभव है।
प्रशिक्षण के दौरान छत पर उद्यानिकी, जिसे रूफटॉप गार्डन या टेरेस गार्डन भी कहा जाता है, की विस्तृत जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को गमलों की तैयारी, गमलों की भराई, उपयुक्त स्थान का चयन, गमलों को व्यवस्थित रखने की विधि तथा टेरेस गार्डनिंग के लिए उपयुक्त पौधों के चयन के बारे में बताया गया। सब्जियां, फल, फूल, पत्तेदार सब्जियां, जड़ी-बूटियां और शोभादार पौधों की खेती के संबंध में तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।
इसके साथ ही खाद एवं पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों को जैविक खाद तैयार करने और प्राकृतिक विधियों से पौधों की सुरक्षा करने के उपाय बताए गए।
वर्टिकल गार्डनिंग के अंतर्गत कम स्थान में अधिक पौधे उगाने की तकनीक समझाई गई। दीवारों, खिड़कियों, हैंगिंग पॉट्स, ग्रो बैग और प्लांट स्टैंड का उपयोग कर इनडोर और आउटडोर दोनों स्थानों पर पौधरोपण की विधि प्रदर्शित की गई। सजावटी पौधों में मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, कैक्टस, एलोवेरा, जरबेरा, गुलदाउदी, जेरेनियम और बिगोनिया जैसे पौधों की जानकारी दी गई। वहीं सब्जी वर्ग में टमाटर, लौकी, बीन्स, करेला, मटर, लोबिया और तोरई की उन्नत विधि से खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से तकनीकों को समझा। महाविद्यालय प्रशासन ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनेंगे तथा भविष्य में स्वरोजगार स्थापित कर कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाएंगे।





