वेद विभाग द्वारा भारतीय सेना के प्रति युवाओं में जागरूकता विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न।
पुलवामा शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि,युवाओं को राष्ट्रसेवा के संकल्प का संदेश।
करौदी,ग्रामीण खबर MP।
पुलवामा आतंकी हमले में बलिदान हुए वीर जवानों की स्मृति में 14 फरवरी 2026, शनिवार को महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा के संरक्षण में “भारतीय सेना के प्रति युवाओं में जागरूकता” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं भारतीय सेना के प्रति सम्मान की भावना जागृत करना रहा।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र का आयोजन पेंडरई ग्राम स्थित मंगल पांडेय स्मारक के समीप किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारतमाता की पूजार्चना से हुआ। तत्पश्चात् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी मंगल पांडेय को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनों ने पुलवामा हमले सहित राष्ट्र की रक्षा में बलिदान देने वाले समस्त वीर जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखकर नमन किया।
इस अवसर पर पेंडरई के अनील गर्ग एवं महनेर की सविता बाजपेई सहित शहीद परिवारों के सदस्यों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र से सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता योग विभागाध्यक्ष डॉ. नित्येश्वर चतुर्वेदी ने की। ग्राम पेंडरई के सरपंच अखिल दुबे विशेष अतिथि रहे तथा स्मारक निर्माता महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, करौंदी के आचार्य ललित गौतम मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. आलोक चन्द्र परिडा ने उद्देश्य कथन प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्र रक्षा से बढ़कर कोई पुण्य, व्रत या यज्ञ नहीं है। राष्ट्र रक्षा ही सर्वोपरि कर्तव्य है। वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में शहीदों के अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा एवं त्याग को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए राष्ट्रसेवा के संकल्प को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
इस गरिमामयी अवसर पर पेंडरई ग्राम एवं आसपास के क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के साथ विश्वविद्यालय परिवार के डॉ. नवीन चौबे,अशोक सिंह, डॉ. खुशेन्द्र चतुर्वेदी, डॉ. चन्द्रशेखर मिश्र, डॉ. अंकित राठौर, हरिनारायण शर्मा,धनीराम त्रिपाठी,स्वतन्त्र द्विवेदी किशोर महलोनिया, माधुरी गर्ग, रंजिता परौहा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं शहीदों के आदर्शों को आत्मसात करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
संगोष्ठी का द्वितीय सत्र दोपहर 2 बजे से आभासी जूम माध्यम से आयोजित किया गया। यह सत्र विश्वविद्यालय के वेद विभाग एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम, मध्यप्रदेश प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। मंगलाचरण के साथ व्याख्यान कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
मुख्य वक्ता जे. वी. पाण्डेय ने भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान चुनौतियों एवं युवाओं के लिए उपलब्ध करियर अवसरों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने आपदा प्रबंधन एवं राष्ट्रीय संकट के समय सेना की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए युवाओं को सेना में सेवा के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट वक्ताओं में धर्मगुरु9 संजय रथ ने राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए युवाओं को आत्मबल एवं चरित्र निर्माण की प्रेरणा दी। धर्मगुरु जलज शर्मा ने वैदिक परंपरा में राष्ट्ररक्षा की अवधारणा स्पष्ट करते हुए “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” के संदर्भ में राष्ट्ररक्षा को सर्वोपरि बताया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. आलोक चन्द्र परिडा ने वेदोपनिषदों एवं श्रीमद्भगवद्गीता के उदाहरणों द्वारा राष्ट्ररक्षा को स्वधर्म बताते हुए कहा कि अपने कर्तव्य का पालन ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। उन्होंने “वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः” मंत्र का उल्लेख करते हुए राष्ट्र के प्रति सजग और समर्पित रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार मिश्र तथा सह-संयोजक डॉ. चन्द्रशेखर मिश्र, डॉ. नेहा मिश्रा, हरिनारायण शर्मा एवं धनीराम त्रिपाठी के कुशल निर्देशन में संगोष्ठी सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 100 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता दर्ज की।
संगोष्ठी के अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन युवाओं में राष्ट्रभक्ति एवं भारतीय सेना के प्रति सम्मान की भावना जागृत करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ।



