भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश राय को पितृ शोक,सेवा निवृत्त शिक्षक बीरबल राय का निधन।
सिलोड़ी क्षेत्र में गहरा दुःख,शिक्षा,समाज और पारिवारिक संस्कारों की मजबूत नींव रखने वाले वयोवृद्ध शिक्षक के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
सिलोड़ी क्षेत्र के वरिष्ठतम और सम्मानित सेवा निवृत्त शिक्षक बीरबल राय का 30 नवम्बर की शाम अचानक निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की गहरी लहर फैल गई। सरल, गंभीर और अनुशासनप्रिय स्वभाव के धनी बीरबल राय को सिलोड़ी ही नहीं, आसपास के गांवों में भी बड़े आदर के साथ याद किया जाता था। उन्होंने अपने लम्बे शिक्षकीय जीवन में सैकड़ों विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और जीवन दिशा प्रदान की।
बीरबल राय, भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश राय तथा शिक्षक सनत राय के पिता थे। वे जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय के मौसिया ससुर थे, साथ ही भाजपा मंडल उपाध्यक्ष अमित राय और सिलोड़ी उपसरपंच राहुल राय के नाना भी थे। परिवार की सामाजिक और राजनीतिक पहचान को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणजनों का बड़े पैमाने पर आगमन हुआ। सभी ने दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।
बीरबल राय को क्षेत्र में एक आदर्श शिक्षक के रूप में विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त थी। पंचायती, सामाजिक और शैक्षणिक मामलों में उनकी राय हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती थी। वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द, सहयोग और नैतिकता को मजबूत बनाने के प्रयासों में भी अग्रणी भूमिका निभाते थे। लोगों का कहना है कि उनका जीवन अनुशासन, सादगी और विनम्रता की मिसाल था।
ग्रामवासियों ने बताया कि बीरबल राय के मार्गदर्शन और सलाह से कई युवा शिक्षा, नौकरी और समाजसेवा में आगे बढ़े। उनकी प्रेरणा से कई परिवारों ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
निधन की खबर मिलते ही अंतिम दर्शन हेतु लोगों की भीड़ लगातार उमड़ती रही। बुजुर्गों से लेकर युवा तक सभी ने उनके प्रति अपनी भावनात्मक श्रद्धा व्यक्त की। महिलाएँ भी बड़ी संख्या में पहुंचीं और परिवार को सांत्वना दी। ग्रामीणों का कहना है कि बीरबल राय का जाना किसी परिवार का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र का नुकसान है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
परिजनों ने बताया कि बीरबल राय स्वभाव से अत्यंत शांत और संयमी थे। वे जीवनभर अनुशासन और सेवा की भावना से जुड़े रहे। परिवार और समाज दोनों के लिए वे एक मजबूत स्तंभ थे। उनके पुत्र, नाती–पोते और पूरा परिवार उनकी सीख, उनके संस्कार और उनके व्यक्तित्व को अपनी सबसे बड़ी धरोहर मानते हैं।
अंत्येष्टि कार्यक्रम स्थानीय मुक्तिधाम में सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
क्षेत्रवासियों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दे। सिलोड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक बीरबल राय का योगदान याद किया जाता रहेगा। उनका जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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