कल 3 दिसंबर से होगी क्रमिक भूख हड़ताल के साथ सिहोरा जिला आंदोलन की शुरुआत,6 दिसंबर से प्रमोद साहू का अन्न सत्याग्रह और 9 दिसंबर से आमरण सत्याग्रह।

 कल 3 दिसंबर से होगी क्रमिक भूख हड़ताल के साथ सिहोरा जिला आंदोलन की शुरुआत,6 दिसंबर से प्रमोद साहू का अन्न सत्याग्रह और 9 दिसंबर से आमरण सत्याग्रह।

लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, गांव-गांव से बढ़ रहा जनसमर्थन,समिति ने जनता से व्यापक सहभागिता की अपील की।

सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।

सिहोरा जिला बनाने की दशकों पुरानी मांग अब निर्णायक संघर्ष के चरण में प्रवेश कर चुकी है। लंबे समय से सिहोरा क्षेत्र की उपेक्षा, प्रशासनिक संसाधनों की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से परेशान स्थानीय नागरिक अब बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने घोषणा की है कि कल 3 दिसंबर से क्रमिक भूख हड़ताल की शुरुआत की जाएगी। इस चरणबद्ध आंदोलन में प्रतिदिन अलग-अलग समाजिक संगठन, व्यापारी समूह, किसान संगठन, युवाओं के दल और महिला इकाइयाँ उपवास पर बैठकर अपनी आवाज सरकार तक पहुँचाएंगी।

समिति की ओर से जारी बयान के अनुसार सिहोरा को जिला बनाने की मांग वर्षों से लंबित है, लेकिन शासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक केवल आश्वासन ही दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्यवाही न होने से लोगों में नाराजगी और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। समिति का कहना है कि अब समय आ गया है कि क्षेत्र की जनता अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी संघर्ष को आगे बढ़ाए।

इसी कड़ी में 6 दिसंबर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक प्रमोद साहू अन्न सत्याग्रह की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि सिहोरा के साथ लगातार हो रही उपेक्षा दर्दनाक है और जिले की मांग सामाजिक, प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय दृष्टि से पूरी तरह तर्कसंगत है। उनका अन्न सत्याग्रह इस आंदोलन को विचारात्मक शक्ति और नैतिक मजबूती प्रदान करेगा।श्री साहू का कहना है कि जब तक सिहोरा को उसका अधिकार नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष रुकेगा नहीं।

आंदोलन समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 दिसंबर से प्रमोद साहू आमरण सत्याग्रह पर बैठेंगे, जिसमें वे जल का भी त्याग करेंगे। इस चरण में कई वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, महिला संगठन, युवा इकाइयाँ और ग्रामीण प्रतिनिधि भी शामिल होने की घोषणा कर चुके हैं। समिति ने बताया कि यह सत्याग्रह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि सिहोरा के 15 से अधिक विकासखंडों से उठी सामूहिक पीड़ा और वर्षों से चले आ रहे प्रशासनिक उपेक्षा के विरुद्ध जनस्वर है।

उधर व्यापारी संगठनों, परिवहन संघ, समाजसेवी संस्थाओं, किसान यूनियनों तथा ग्राम स्तर की समितियों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा है कि सिहोरा की बढ़ती जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल की व्यापकता और प्रशासनिक दबाव को देखते हुए जिला बनना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान व्यवस्था में नागरिकों को पासपोर्ट, कोर्ट, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और संसाधनों की भारी खपत होती है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिला बनने से न केवल स्थानीय जनता को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित होगा।

ग्राम पंचायतों और सामाजिक संगठनों ने गांव-गांव में बैठकें कर आमजन को आंदोलन में जुड़ने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है। युवाओं द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा, तिथियाँ, कार्यक्रम और जनअपील साझा की जा रही है। कई गांवों में मशाल जुलूस और जागरूकता रैलियाँ भी निकाली जा रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिक इस जनांदोलन का हिस्सा बन सकें।

आंदोलन समिति ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि किसी भी आंदोलन की सफलता जनता की सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है। समिति ने आग्रह किया है कि लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर क्रमिक भूख हड़ताल, अन्न सत्याग्रह और आमरण सत्याग्रह को सफल बनाएं, जिससे सिहोरा जिला बनाने की आवाज शासन तक और अधिक सशक्त रूप में पहुंचे। समिति ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप रहेगा।

समिति ने इस बात पर जोर दिया कि यह संघर्ष न तो किसी दल के खिलाफ है और न ही किसी व्यक्ति के विरुद्ध, बल्कि यह सिहोरा क्षेत्र की 8 लाख से अधिक आबादी की सांझी उम्मीद और अधिकार की लड़ाई है। आंदोलनकारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस जनभावना को समझेगी और सिहोरा को शीघ्र ही जिला का दर्जा प्रदान करेगी।

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