सिहोरा में जिला आंदोलन उग्र,तीसरे दिन भी जारी रही क्रमिक भूख हड़ताल,आज से अन्न-त्याग सत्याग्रह और 9 दिसंबर को आमरण अनशन का ऐलान।

 सिहोरा में जिला आंदोलन उग्र,तीसरे दिन भी जारी रही क्रमिक भूख हड़ताल,आज से अन्न-त्याग सत्याग्रह और 9 दिसंबर को आमरण अनशन का ऐलान।

प्रमोद साहू आज दोपहर 3 बजे से शुरू करेंगे अन्न-सत्याग्रह—9 दिसंबर को पूर्ण बंद,विशाल जनसमूह का सिहोरा आगमन और आमरण सत्याग्रह।

सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।

जिला बने सिहोरा की मांग को लेकर प्रारंभ हुआ जनसंघर्ष दिनोंदिन व्यापक और उग्र रूप लेता जा रहा है। आंदोलन के तीसरे दिन भी क्रमिक भूख हड़ताल निर्बाध जारी रही। पुराने बस स्टैंड स्थित धरना स्थल पर सुबह से शाम तक जनसमर्थन का निरंतर प्रवाह बना रहा। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे नागरिकों ने न केवल आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि जिला आंदोलन के प्रति अपने अटूट समर्पण का भी परिचय दिया।

महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति, युवाओं का जोश और बुजुर्गों का आशीर्वाद आंदोलन को नई दिशा और मजबूती प्रदान कर रहा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को खुले समर्थन का संदेश दिया। इससे जिले की मांग को लेकर समाज के सभी वर्गों की एकजुटता स्पष्ट दिखाई दे रही है।

धरना स्थल पर पूरा दिन जोश, उत्साह और संघर्ष के संकल्प से भरा रहा। वहां लगातार नारे गूंजते रहे और लोग बार-बार यह संदेश देते रहे कि अब जिला सिहोरा की मांग किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दो दशक से अधिक समय से लंबित मांग अब जनता के धैर्य की सीमा पार कर चुकी है, और यही कारण है कि यह आंदोलन अब जनांदोलन में बदल गया है।

आज से अन्न-सत्याग्रह

आरएसएस के पूर्व प्रचारक प्रमोद साहू ने आंदोलन को तपस्या, संयम और त्याग के मार्ग पर आगे ले जाने का निर्णय लिया है। 6 दिसंबर को दोपहर 3 बजे से वे अन्न-त्याग सत्याग्रह प्रारंभ करेंगे। इससे पहले वे काल भैरव चौक मंदिर में सद्बुद्धि यज्ञ करेंगे, जिसमें जिले की घोषणा हेतु सामूहिक प्रार्थना की जाएगी। उनका यह अन्न-सत्याग्रह आंदोलन के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है और इससे जनभावनाओं को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

9 दिसंबर से आमरण सत्याग्रह

आंदोलन समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 9 दिसंबर से प्रमोद जी भाई साहब आमरण सत्याग्रह प्रारंभ करेंगे, जिसमें वे अन्न और जल दोनों का त्याग करेंगे। यह आंदोलन का सबसे कठोर और संवेदनशील चरण माना जा रहा है। समिति ने जनता से अपील की है कि इस दौरान सभी नागरिक शांति, अनुशासन और पूर्ण नियंत्रण के साथ आंदोलन का समर्थन करें, ताकि जिला मांग के संदेश को पूरे प्रदेश में दृढ़ता से पहुंचाया जा सके।

9 दिसंबर को पूर्ण बंद और हजारों का जनसैलाब

9 दिसंबर को ही ढीमरखेड़ा, बहोरीबंद, मझौली, खितौला, सिहोरा क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग सिहोरा आने वाले हैं। उस दिन शहर में जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है। सिहोरा–खितौला के व्यापारियों ने भी पूर्ण बंद का आह्वान किया है, ताकि व्यापारिक समुदाय द्वारा भी इस मांग को मजबूती मिले।

आंदोलन समिति ने बताया कि पुराने बस स्टैंड का प्रांगण क्रमिक धरना और आगामी आमरण सत्याग्रह का केंद्र बना रहेगा। यहां से आंदोलन की दिशा और निर्णय प्रतिदिन तय किए जाएंगे।

जनता की भावना—अब जिला बनकर ही रहेगा

संगठन ने दोहराया कि सिहोरा की उपेक्षा अब चरम पर पहुंच चुकी है। वर्षों से जनता द्वारा दिए गए समर्थन और संघर्ष के बावजूद जिला घोषित नहीं होना यहां के लोगों की भावनाओं को आहत करता रहा है। अब जनता साफ कर चुकी है कि किसी भी कीमत पर अपना अधिकार लेकर ही रहेगी। यह आंदोलन अब केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि जनसम्मान की लड़ाई बन चुका है।

गांव-गांव, चौक-चौराहों और सामाजिक मंचों पर एक ही आवाज सुनाई दे रही है—जिला बनाओ, सिहोरा बचाओ। पूरे क्षेत्र में जनचेतना की लहर फैल चुकी है और आंदोलन समिति के अनुसार आने वाले दिन निर्णायक साबित हो सकते हैं।

यह बैठे क्रमिक भूख हड़ताल पर

शुक्रवार को क्रमिक भूख हड़ताल पर प्रकाश दुबे, मनोज कुमार, संजय पाठक, संतोष वर्मा, एम.एल. गौतम, राकेश पाठक, कृष्ण कुमार कुररिया, अनिल जैन, रामजी शुक्ला, प्रदीप दुबे और निसार अहमद बैठे। समिति ने इन सभी साथियों के त्याग की सराहना करते हुए जनता से निरंतर समर्थन की अपील की है।

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