ढीमरखेड़ा में अवैध शराब माफियाओं का बोलबाला,प्रशासन बेबस,आम जनता परेशान।

 ढीमरखेड़ा में अवैध शराब माफियाओं का बोलबाला,प्रशासन बेबस,आम जनता परेशान।

अवैध पैकारियों पर रोक लगाने में नाकाम आबकारी एवं पुलिस तंत्र पर उठे सवाल,महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों में बढ़ती असुरक्षा,कलेक्टर से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील इन दिनों अवैध शराब माफियाओं के कब्जे में दिखाई दे रही है। प्रदेश सरकार जहां शराब नीति के माध्यम से नियंत्रित व्यापार से राजस्व वृद्धि का दावा कर रही है, वहीं धरातल पर इस तहसील में स्थिति बिल्कुल उलट नज़र आती है। अवैध शराब की पैकारियां इतनी निर्भीकता से संचालित हो रही हैं कि प्रशासनिक अमले की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन के कुछ हिस्सों में बैठे प्रभावशाली तत्व और कथित सफेदपोशों का अप्रत्यक्ष संरक्षण इस धंधे को और अधिक खतरनाक बना रहा है।

जानकारी के अनुसार ढीमरखेड़ा मुख्यालय और आसपास के गांवों में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है। यहां चार से पांच वैध शराब दुकानों का संचालन करने वाले कथित ठेकेदार आकाश जायसवाल के नेटवर्क के आसपास अवैध पैकारियों का बड़ा तंत्र तैयार हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतें, मीडिया में खबरें और जनदबाव के बावजूद प्रशासन मानो इन कारोबारियों के सामने नतमस्तक हो गया है। आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता ने माफियाओं के हौसले और बढ़ा दिए हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति गांवों में शाम के समय देखने को मिलती है। कई गांवों में अवैध शराब की पैकारियां निडरता से संचालित हो रही हैं, जिसके चलते शाम ढलते ही गांवों का माहौल असामान्य रूप से बिगड़ जाता है। शराबियों की भीड़, गाली-गलौज, आपसी झगड़े और सड़क पर हंगामे आम हो चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि नशे में धुत लोगों की हरकतों के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इन परिस्थितियों ने महिलाओं, बच्चों और छात्राओं के मन में भय का वातावरण पैदा कर दिया है। कई महिलाएं बताती हैं कि शाम होने के बाद घर से निकलना जोखिम भरा लगता है।

स्थानीय नागरिकों द्वारा इस गंभीर समस्या को लेकर प्रशासन को बार-बार ज्ञापन दिए गए, कई बार जिला स्तर पर आवेदन प्रस्तुत किए गए, मगर हालात जस के तस बने हुए हैं। समाचार माध्यमों द्वारा लगातार प्रकाशित रिपोर्टें भी प्रशासन की नींद नहीं खोल पाई हैं। इसके चलते क्षेत्र में चर्चा आम है कि आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की कथित मिलीभगत ही इस अवैध कारोबार को फलने-फूलने का अवसर दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो कुछ ही दिनों में पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकता है, मगर कार्रवाई की गति बेहद धीमी है, या कहें कि रुकी हुई है।

ढीमरखेड़ा क्षेत्र के सजग और जिम्मेदार नागरिकों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया जाए और माफियाओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि जब तक ऊपरी स्तर से ठोस निर्देश नहीं मिलेंगे, तब तक स्थानीय अधिकारियों द्वारा की जा रही औपचारिक कार्रवाइयों से कोई वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है। लोगों का यह भी कहना है कि अवैध शराब ने न केवल सामाजिक वातावरण को बिगाड़ा है, बल्कि युवाओं को भी गलत राह पर धकेल दिया है। ऐसे में प्रशासन की त्वरित और निर्णायक भूमिका बेहद आवश्यक है।

इस संदर्भ में एसडीएम और थाना प्रभारी ढीमरखेड़ा ने आश्वासन दिया है कि अवैध शराब की पैकारियों को तत्काल बंद कराया जाएगा और इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के इस बयान से ग्रामीणों में आशा जगी है, लेकिन लोग यह भी चाहते हैं कि कार्रवाई केवल घोषणा तक सीमित न रहकर धरातल पर प्रभावी परिणाम लेकर आए।

क्षेत्र के नागरिकों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने अब भी सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में सामाजिक वातावरण और गंभीर रूप धारण कर सकता है। लोगों का मानना है कि कलेक्टर स्तर की हस्तक्षेपात्मक कार्रवाई ही इस अवैध नेटवर्क को समाप्त कर ढीमरखेड़ा को राहत दे सकती है।

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