सिहोरा जिला की मांग पर कल खून के दिए जलाएंगे सिहोरावासी।

 सिहोरा जिला की मांग पर कल खून के दिए जलाएंगे सिहोरावासी।

विकास दुबे के नेतृत्व में लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति का अनोखा विरोध,कहा, “अब आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए”।

सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।

सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग वर्षों से जारी है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों के सिवा अब तक कुछ नहीं मिला। इसी उपेक्षा के खिलाफ सिहोरा की जनता ने दीपावली से एक दिन पूर्व, 19 अक्टूबर की शाम को एक अनोखे और भावनात्मक विरोध का ऐलान किया है। “लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति” के नेतृत्व में सैकड़ों सिहोरावासी अपने खून से बने दीये जलाकर सरकार तक अपनी आवाज पहुँचाएंगे। यह कार्यक्रम सिहोरा के पुराने बस स्टैंड परिसर में शाम 6 बजे से आरंभ होगा, जहाँ पिछले चार वर्षों से आंदोलन लगातार चल रहा है।

लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति के संयोजक विकास दुबे ने बताया कि सिहोरा की जनता ने अब तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखी है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि “सिहोरा की जनता अब केवल शब्द नहीं, निर्णय चाहती है। जब जनता ने हर बार भरोसा जताया और जनप्रतिनिधियों ने केवल आश्वासन दिए, तो अब यह आंदोलन जनता की पीड़ा का प्रतीक बन गया है।” श्री दुबे ने स्पष्ट कहा कि यह कार्यक्रम सरकार के प्रति आक्रोश नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और अस्तित्व की रक्षा का संदेश है।

उन्होंने बताया कि इस आयोजन के दौरान सैकड़ों नागरिक एकत्र होंगे और पहले चरण में रक्तदान किया जाएगा। एकत्रित रक्त को प्रतीकात्मक रूप से दीपकों में भरा जाएगा, जिन्हें बाद में जलाकर सिहोरा की “बलिदान की ज्योति” के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। समिति का कहना है कि यह प्रदर्शन सिहोरा की उपेक्षा के प्रति जनता की भावनाओं को उजागर करेगा और यह बताने का प्रयास करेगा कि अब सिहोरावासी अपने अधिकारों के लिए अंतिम सीमा तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

श्री दुबे ने आगे बताया कि पिछले चार वर्षों से सिहोरा जिला आंदोलन ने कई बार धरना, ज्ञापन, रैली और सांकेतिक विरोध के माध्यम से अपनी मांग रखी है। जिला गठन का प्रस्ताव कई बार प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में आया, लेकिन अब तक फाइलें सिर्फ दफ्तरों में घूम रही हैं। जनता के सब्र का बाँध टूट चुका है और दीपावली के पूर्व यह खून से दीये जलाने का निर्णय इसी असंतोष का परिणाम है।

समिति के सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहेगा। किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था की स्थिति न बने, इसके लिए स्थानीय प्रशासन को पूर्व सूचना दी जा चुकी है। समिति का मानना है कि यदि इस बार भी सरकार ने सिहोरा की भावनाओं को नहीं समझा, तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।

आंदोलन समिति के सदस्यों अनिल जैन, कृष्ण कुमार कुररिया, मानस तिवारी, सुशील जैन, रामजी शुक्ला, नंद कुमार परोहा, प्रदीप दुबे, नवीन शुक्ला, अमित बक्शी, संतोष पांडे, अनिल कुररिया, नीतेश खरया, राकेश पाठक, राजेश कुररिया, मोहन सोंधिया, नत्थू पटेल, संतोष वर्मा, आनंद प्रकाश जैन और जितेंद्र श्रीवास ने संयुक्त रूप से सिहोरा के नागरिकों से आह्वान किया है कि वे बड़ी संख्या में 19 अक्टूबर की शाम 6 बजे पुराने बस स्टैंड पर पहुँचें और इस ऐतिहासिक विरोध का हिस्सा बनें।

जनता का कहना है कि सिहोरा जिला बनने से न केवल प्रशासनिक सुविधा बढ़ेगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। सिहोरा की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या और प्रशासनिक योग्यता को देखते हुए यह मांग पूरी तरह जायज़ है। लेकिन वर्षों से अनदेखी के कारण नागरिकों में गहरा असंतोष है।

आंदोलन समिति का यह भी कहना है कि अब तक दिए गए आश्वासनों की अवधि समाप्त हो चुकी है। दीपावली के पहले खून के दीये जलाना कोई नकारात्मक विरोध नहीं, बल्कि यह जनता की उस जलती हुई भावना का प्रतीक है जो हर बार उपेक्षा के अंधेरे में बुझा दी जाती है। समिति ने साफ कहा कि जब तक सिहोरा को जिला घोषित नहीं किया जाता, यह आंदोलन इसी तरह शालीन, प्रतीकात्मक और लगातार जारी रहेगा — क्योंकि सिहोरा अब अपनी पहचान के लिए अडिग है।

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