टी आई के कमिटमेंट पर गूंज उठी तालियां,छात्रों के आंदोलन ने दिलाई स्पीड ब्रेकर की गारंटी।
ढीमरखेड़ा शासकीय महाविद्यालय के सामने सड़क सुरक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं का उग्र प्रदर्शन,प्रशासन ने तुरंत रोड स्टड और 12 दिन में स्थायी स्पीड ब्रेकर बनाने का दिया आश्वासन,हादसों के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर फिर उठी गंभीर चिंताएं।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP
शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा के सामने मंगलवार को दोपहर बाद अचानक छात्रों की भीड़ सड़क पर उतर आई और उन्होंने हाथों में तख्तियां थामकर, नारे लगाते हुए सड़क सुरक्षा की मांग उठाई। कॉलेज परिसर से लेकर मुख्य मार्ग तक छात्रों का जमावड़ा इस कदर था कि कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया। दरअसल,सोमवार 15 सितंबर को दोपहर लगभग 3:30 बजे कॉलेज के समीप हुए हाईवे हादसे ने छात्रों के आक्रोश को भड़का दिया था। हादसे में घायल हुए लोगों की स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों ने ठान लिया कि अब चुप नहीं बैठा जाएगा और सड़क सुरक्षा के लिए मजबूती से आवाज उठाई जाएगी।
विद्यार्थियों ने कहा कि कॉलेज के सामने भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वालों के कारण रोजमर्रा के जीवन में खतरा बना रहता है। विशेषकर कॉलेज आने-जाने वाले छात्रों और स्थानीय नागरिकों को हर पल दुर्घटना की आशंका सताती रहती है। कई बार छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रही हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालिया हादसा तो जैसे अंतिम चेतावनी साबित हुआ और इसी कारण विद्यार्थियों को विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा।
सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार आकांक्षा चौरसिया और ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी अभिषेक चौबे तुरंत दलबल सहित मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पहले छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। छात्रों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सड़क पर स्थायी स्पीड ब्रेकर नहीं बनते, तब तक हादसों पर अंकुश लगाना संभव नहीं है।
चर्चा के बाद प्रशासन की ओर से छात्रों को भरोसा दिलाया गया कि अस्थायी व्यवस्था के तहत रोड स्टड्स लगाकर तत्काल राहत दी जाएगी। साथ ही 12 दिनों के भीतर सीमेंट और डामर से बने स्थायी स्पीड ब्रेकर का निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा। यह आश्वासन सुनने के बाद भी छात्रों की चिंता दूर नहीं हुई और वे बार-बार यही पूछते रहे कि क्या इस बार वादा सच में पूरा होगा या फिर यह भी केवल कागजों में सिमटकर रह जाएगा।
तभी मौके पर मौजूद ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी अभिषेक चौबे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए दृढ़ स्वर में कहा—“कमिटमेंट कर दिया तो कर दिया।” यह सुनते ही छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया और वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। छात्रों ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि अब उन्हें भरोसा है कि कॉलेज के सामने स्पीड ब्रेकर का निर्माण होकर रहेगा और सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम होगा।
आंदोलन समाप्त करने के बाद
छात्र-छात्राओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज और आम जन की सुरक्षा के लिए लड़ी गई है। उनका कहना था कि यदि प्रशासन अपने वादे पर कायम रहता है तो आने वाले दिनों में ढीमरखेड़ा ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी लोग सड़क पर सुरक्षित चल सकेंगे।
गौरतलब है कि शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा में प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या गांव से पैदल या साइकिल से आने वालों की होती है। ऐसे में सड़क किनारे बिना स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक नियंत्रण के यह सड़क हमेशा ही खतरनाक साबित होती रही है। छात्रों का मानना है कि जिस तरह से हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए जाते तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ग्रामीण अंचलों में सड़क सुरक्षा की स्थिति कितनी दयनीय है। महाविद्यालय के सामने स्पीड ब्रेकर बनाने का यह आंदोलन भले ही छोटा प्रतीत हो, लेकिन इसका संदेश बड़ा है कि जब युवा पीढ़ी जागरूक होती है और संगठित होकर अपनी बात रखती है, तो प्रशासन को भी झुकना पड़ता है।
छात्रों के इस आंदोलन ने जहां प्रशासन को सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर किया है, वहीं समाज को यह संदेश भी दिया है कि सामूहिक प्रयासों से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
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