ग्रामपंचायत देगवा महगवां में भ्रष्टाचार की पुनः जाँच, बीपीओ श्री मार्को ने दर्ज किए ग्रामीणों के बयान।

 ग्रामपंचायत देगवा महगवां में भ्रष्टाचार की पुनः जाँच, बीपीओ श्री मार्को ने दर्ज किए ग्रामीणों के बयान।

सरपंच पति पर जातिवादी टिप्पणी, धमकी और फर्जी दस्तावेज़ों के आरोप; जाँच में शिकायतें पाई गईं सत्य।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर mp:

जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्रामपंचायत देगवा महगवां एक बार फिर भ्रष्टाचार, दमन और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को लेकर सुर्खियों में आ गया है। ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनहित कार्यों में पारदर्शिता की कमी को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार जांच अधूरी या पक्षपातपूर्ण रही। इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने पुनः एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की, जिसके परिणामस्वरूप जनपद पंचायत के बीपीओ श्री मार्को ने 27 जुलाई 2025 को ग्राम में पहुंचकर स्वतंत्र रूप से पुनः जांच की।

ग्राम महगवां में ग्रामीणों की उपस्थिति में बीपीओ द्वारा शिकायतों की बिंदुवार समीक्षा की गई और मौके पर ही पंचनामा तैयार किया गया। ग्रामीणों ने अपने बयान में कहा कि सरपंच पति महेश यादव द्वारा मोबाइल फोन से जातिसूचक एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है। साथ ही उन्हें धमकाने, झूठे मामलों में फँसाने तथा पंचायत के लेटरपैड का निजी स्वार्थ में दुरुपयोग करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए।

ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूर्व में दो से तीन बार जांच हो चुकी है, लेकिन उन जांचों में निष्पक्षता नहीं बरती गई और शिकायतों को दबाने का प्रयास किया गया। इस बार जब बीपीओ स्वयं गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिला। बीपीओ श्री मार्को द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर क्रमांक 1 से 5 तक की शिकायतों को सही और तथ्यात्मक पाया गया, जिसकी पुष्टि पंचनामा में भी की गई है।

पंचायत में हुए कार्यों की जांच के दौरान एक विशेष मामला प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्रीवाल निर्माण से जुड़ा रहा। इस संबंध में जब सरपंच पति से स्पष्टीकरण मांगा गया तो उन्होंने कहा कि बाउंड्रीवाल 85 मीटर तक ही बनाई गई है, जबकि यदि अधिकारी 110 मीटर की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं तो उसका उत्तर वही देंगे। यह बयान अपने आप में प्रशासनिक जवाबदेही से पल्ला झाड़ने जैसा प्रतीत हुआ।

ग्रामवासियों ने बीपीओ को यह भी बताया कि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। कई योजनाओं के तहत राशि निकाली गई लेकिन उसका कोई प्रत्यक्ष लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला। पेंशन, शौचालय, मजदूरी भुगतान जैसी बुनियादी योजनाओं में भी भारी अनियमितताएँ सामने आई हैं।

ग्रामीणों का यह भी कहना था कि सरपंच स्वयं पंचायत कार्यों में सक्रिय नहीं रहते बल्कि उनके पति ही सभी निर्णय लेते हैं, और उनका व्यवहार ग्रामीणों के प्रति अत्यंत अपमानजनक रहता है।  जिसमें पंचायत द्वारा की जा रही उपेक्षा और अपमानजनक भाषा का उल्लेख किया गया।

जाँच के दौरान बीपीओ ने स्पष्ट किया कि वे सभी शिकायतों की रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे और जिन मामलों में आपराधिक स्वरूप है, वहाँ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। पंचनामा को ग्रामीणों की उपस्थिति में तैयार किया गया जिससे जांच की पारदर्शिता बनी रहे।

गाँव के वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने प्रशासन से यह मांग भी की है कि ऐसी घटनाओं में केवल जाँच से बात नहीं बनेगी, बल्कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि ग्राम पंचायत में ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित की भावना वापस लौट सके।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार जाँच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई कर ग्राम पंचायत की गरिमा को पुनः स्थापित किया जाएगा। अब पूरा गांव प्रशासनिक कार्यवाही की दिशा में उठाए जाने वाले अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहा है।

प्रधान संपादक:अज्जू सोनी,ग्रामीण खबर mp

संपर्क सूत्र:9977110734

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