तहसीलदारों ने खोला विरोध का मोर्चा, गैर न्यायालयीन कार्य विभाजन पर जताई आपत्ति।

 तहसीलदारों ने खोला विरोध का मोर्चा, गैर न्यायालयीन कार्य विभाजन पर जताई आपत्ति।

मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव के नाम कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन, निर्णय को बताया असंवैधानिक और मनमाना।

कटनी,ग्रामीण खबर mp:

प्रदेश सरकार द्वारा तहसीलदारों के कार्यों को न्यायालयीन और गैर न्यायालयीन श्रेणियों में विभाजित किए जाने के फैसले ने प्रशासनिक अमले में असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है। तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों ने इस फैसले के खिलाफ सामूहिक रूप से मोर्चा खोलते हुए विरोध दर्ज कराया है। बुधवार को तहसीलदार संघ के पदाधिकारियों द्वारा कटनी कलेक्टर दिलीप यादव को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसे प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव के नाम संबोधित किया गया था।

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह निर्णय बिना किसी पूर्व शोध, समिति की सिफारिश या विस्तृत अध्ययन के ही लागू किया गया है। तहसीलदारों ने कहा कि शासन द्वारा उठाया गया यह कदम पारदर्शिता से कोसों दूर है और इसका कोई स्पष्ट उद्देश्य भी सामने नहीं आया है। यह कार्यवाही अधिकारिता के दायरे से बाहर जाकर की गई प्रतीत होती है, जो कि पूरी तरह विधिसम्मत प्रक्रिया के विरुद्ध है।

संघ का यह भी कहना है कि न्यायालयीन एवं गैर न्यायालयीन कार्यों का यह मनमाना विभाजन केवल प्रशासनिक प्रणाली को बाधित नहीं करेगा, बल्कि इससे तहसीलदारों की कार्यस्थल पर प्रतिष्ठा और गरिमा भी प्रभावित होगी। तहसील स्तर पर विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियों को निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका को इस प्रकार वर्गीकृत कर सीमित कर देना न्यायिक स्वायत्तता और प्रशासनिक संतुलन दोनों के लिए हानिकारक होगा।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा इस फैसले को लागू करते समय किसी भी अनुभवी अधिकारी, प्रशासनिक विशेषज्ञ या विधिक सलाहकार की राय नहीं ली गई, जो कि गंभीर चिंता का विषय है। इससे स्पष्ट होता है कि निर्णय जल्दबाज़ी में और बिना उचित विचार-विमर्श के लिया गया है।

तहसीलदारों का यह भी आरोप है कि यह कार्य विभाजन व्यवस्था अधिकारियों को “सिर्फ आदेश पालन” की स्थिति में लाकर खड़ा कर देगा, जिससे स्वतंत्र कार्यप्रणाली और निष्पक्ष निर्णय प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, इससे कार्यभार में असंतुलन उत्पन्न होगा और विवादों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित संघ पदाधिकारियों ने मांग की कि शासन तत्काल इस निर्णय को निरस्त करे और यदि इस पर पुनर्विचार नहीं होता तो तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन की ओर अग्रसर होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अंतर्गत होगा, लेकिन आवश्यकता पड़ी तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन और कार्यबहिष्कार जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।

पदाधिकारियों ने यह भी दोहराया कि तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की भूमिका केवल राजस्व वसूली या सीमांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की पहली पंक्ति के प्रतिनिधि होते हैं। उनके कंधों पर न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि न्यायिक दायित्वों का भी बोझ होता है। ऐसे में इस प्रकार का विभाजन अधिकारियों के मनोबल को गिराने वाला और प्रशासन को कमजोर करने वाला साबित होगा।

ज्ञापन सौंपते समय कटनी तहसीलदार संघ के वरिष्ठ सदस्य, कार्यकारिणी प्रतिनिधि तथा विभिन्न तहसीलों से आए अधिकारियों की उपस्थिति रही। सभी ने इस निर्णय को प्रशासनिक स्वायत्तता के विरुद्ध बताते हुए एक स्वर में इसका विरोध किया और कहा कि यह व्यवस्था न केवल तानाशाही की तरह थोपी गई है, बल्कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही भी खत्म हो जाएगी।

संघ ने अंत में यह चेतावनी दी कि यदि जल्द ही शासन ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो तहसील स्तर पर कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ राजस्व संग्रहण व जनता की समस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया भी बाधित होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी।

इस ज्ञापन के माध्यम से तहसीलदारों ने शासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि वे प्रदेश के राजस्व तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं, तो उनकी राय के बिना उन पर निर्णय थोपना न केवल प्रशासनिक अनुशासन को तोड़ेगा बल्कि व्यवस्था की स्थिरता को भी हिला देगा।

प्रधान संपादक:अज्जू सोनी,ग्रामीण खबर mp

संपर्क सूत्र:9977110734

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