RTO के खिलाफ आवाज उठाने वाले ‘कमांडो’अरुण गौतम पर प्रशासन का बड़ा एक्शन,एक साल के लिए जिला बदर।

 RTO के खिलाफ आवाज उठाने वाले ‘कमांडो’अरुण गौतम पर प्रशासन का बड़ा एक्शन,एक साल के लिए जिला बदर।

पुराने आपराधिक प्रकरणों और पुलिस प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने जारी किया आदेश,रीवा समेत छह जिलों की सीमाओं से रहना होगा बाहर।

रीवा। RTO चेक प्वाइंट पर कथित अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाकर सोशल मीडिया पर चर्चा में आए अरुण कुमार गौतम उर्फ ‘कमांडो’ के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। रीवा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने अरुण गौतम को एक वर्ष के लिए जिला बदर करने का आदेश जारी किया है। प्रशासनिक आदेश के बाद अब उन्हें निर्धारित अवधि तक रीवा सहित आसपास के पांच अन्य जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर रहना होगा।

जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार अरुण कुमार गौतम उर्फ कमांडो को केवल रीवा ही नहीं, बल्कि मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना और मैहर जिले की राजस्व सीमाओं से भी एक वर्ष की अवधि के लिए बाहर रहने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि के दौरान इन जिलों की सीमाओं में प्रवेश करना प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक कार्रवाई का आधार पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरण सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन को बताया गया है। पुलिस रिपोर्ट में अरुण गौतम के खिलाफ पूर्व में दर्ज विभिन्न आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख किया गया है। इनमें मारपीट, गाली-गलौज, डराने-धमकाने, शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य आरोपों से जुड़े मामले बताए गए हैं।

पुलिस प्रतिवेदन में बिजली विभाग के कर्मचारियों को कथित रूप से बंधक बनाने तथा RTO चेक प्वाइंट पर कर्मचारियों के काम में बाधा डालने से संबंधित प्रकरणों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा प्रयागराज में दर्ज एक मामले का जिक्र भी प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों में किए जाने की बात सामने आई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2026 में रीवा के सोहागी क्षेत्र में RTO चेक प्वाइंट पर ट्रक चालकों से कथित अवैध वसूली को लेकर मामला काफी चर्चित हुआ था। इसी दौरान अरुण गौतम उर्फ कमांडो द्वारा परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित अवैध वसूली के आरोप लगाए गए थे। इस घटनाक्रम के बाद वह सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आए थे। हालांकि अवैध वसूली के आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि आरोप और शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

प्रशासन की वर्तमान कार्रवाई का आधार केवल RTO से जुड़ा विवाद नहीं बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिला बदर आदेश में पुराने आपराधिक प्रकरणों तथा पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन को आधार बनाया गया है। यही वजह है कि इस कार्रवाई को RTO विवाद से सीधे जोड़ने के बजाय प्रशासन द्वारा प्रस्तुत कानूनी एवं पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर हुई कार्रवाई के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

बताया जाता है कि अरुण गौतम के खिलाफ पूर्व में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज रहे हैं और वर्ष 2023 में भी उनके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की खबर सामने आई थी। उनके खिलाफ दर्ज मामलों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर पूर्व में न्यायालय का रुख किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड में सामने आई है।

वर्तमान जिला बदर आदेश मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है। प्रशासन का तर्क है कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों और उसके खिलाफ दर्ज मामलों को देखते हुए कानून-व्यवस्था की दृष्टि से यह कदम आवश्यक है।

इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर सरकारी तंत्र और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले अरुण गौतम की आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाती है। एक ओर प्रशासन ने पुराने आपराधिक प्रकरणों को आधार बनाकर जिला बदर का कठोर कदम उठाया है, वहीं दूसरी ओर RTO चेक प्वाइंट पर कथित अवैध वसूली के आरोपों को लेकर उठाए गए सवाल भी इस पूरे प्रकरण को चर्चा के केंद्र में बनाए हुए हैं।

प्रशासनिक आदेश के मुताबिक जिला बदर की अवधि के दौरान अरुण गौतम को रीवा संभाग और आसपास के निर्धारित जिलों की सीमाओं से बाहर रहना होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

फिलहाल यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि एक तरफ प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था और पुराने आपराधिक मामलों से जुड़ी कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ अरुण गौतम की पहचान RTO व्यवस्था पर सवाल उठाने और कथित अवैध वसूली के मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने वाले व्यक्ति के रूप में बनी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी बहस तेज होने की संभावना है।

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