22 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की कथित योजना का स्टिंग,अजयपाल बाबा के बयान से उठे गंभीर सवाल।

 22 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की कथित योजना का स्टिंग,अजयपाल बाबा के बयान से उठे गंभीर सवाल।

दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में हाईवे किनारे सरकारी जमीन,गौशाला और ट्रस्ट के जरिए जमीन हासिल करने की कथित बातचीत सामने आई,प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव होने का भी दावा।

छतरपुर/मध्यप्रदेश। बुंदेलखंड में तेजी से चर्चा में आए अजयपाल बाबा को लेकर दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में सरकारी जमीन और कथित प्रभाव के संबंध में कई गंभीर दावे सामने आए हैं। 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दैनिक भास्कर की टीम ने करीब 30 दिनों तक अंडरकवर रहकर मध्यप्रदेश के छतरपुर, सतना सहित उत्तर प्रदेश के महोबा क्षेत्र में दरबार लगाने वाले छह बाबाओं की पड़ताल की। रिपोर्टर अलग-अलग स्थानों पर कभी निवेशक, कभी मरीज तो कभी श्रद्धालु बनकर पहुंचे और बाबाओं के दावों तथा उनके तौर-तरीकों की पड़ताल की।

इसी जांच के दौरान रिपोर्टर अजयपाल बाबा के दरबार में कथित तौर पर निवेश करने की इच्छा जताते हुए पहुंचा। रिपोर्ट में प्रकाशित बातचीत के अनुसार, अजयपाल बाबा ने हाईवे से लगी करीब 22 एकड़ जमीन का उल्लेख करते हुए उसे सरकारी जमीन बताया। स्टिंग में कथित तौर पर बाबा ने कहा कि सामने दिखाई देने वाले पेड़ों तक की जमीन सरकारी है और दरबार का विस्तार होने पर धीरे-धीरे उस जमीन पर कब्जा किया जा सकता है। इसके साथ ही गौशाला बनवाने के माध्यम से जमीन को अपने पक्ष में करने की बात भी कही गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब रिपोर्टर ने कथित योजना को लेकर आपत्ति या परेशानी की संभावना के बारे में सवाल किया तो बातचीत में बाबा की ओर से कथित तौर पर अपने प्रभाव और समर्थकों का हवाला दिया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बाबा ने 100 लोगों के काम कराने और भविष्य में उनके काम आने की बात कही।

स्टिंग रिपोर्ट में आगे ट्रस्ट बनाकर मंदिर के नाम जमीन चढ़ाने की बात कही जाने का भी दावा किया गया है। इसी बातचीत के दौरान एसपी और कलेक्टर के संबंध में भी बाबा की ओर से कथित रूप से प्रभाव होने का दावा किया गया। रिपोर्ट में सागर के आईजी शुक्ला के उनके यहां आने का भी उल्लेख है। इन दावों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।

दैनिक भास्कर की जांच केवल जमीन संबंधी कथित बातचीत तक सीमित नहीं बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने विभिन्न बाबाओं के आध्यात्मिक और चमत्कार संबंधी दावों की भी पड़ताल की। इसके लिए टीम अपने साथ कर्मकांडी पंडित को लेकर गई और शास्त्रों तथा मंत्रों से जुड़े सवाल भी पूछे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ मौकों पर बाबा इन सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

अजयपाल बाबा को लेकर इससे पहले भी मीडिया रिपोर्टों में उनके तेजी से लोकप्रिय होने और चमत्कारिक दावों का उल्लेख सामने आ चुका है। अप्रैल 2026 में नवभारत टाइम्स ने अजय पार बाबा उर्फ करण कुशवाहा को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें उनके कम उम्र में दरबार लगाने और कैंसर तथा लकवा जैसी गंभीर बीमारियां ठीक करने के दावों का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई बातचीत को अपने आप में सरकारी जमीन पर वास्तविक कब्जे का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। 22 एकड़ जमीन की वास्तविक स्थिति, उसका खसरा नंबर, स्वामित्व, वर्तमान उपयोग, मौके पर किसी निर्माण अथवा कब्जे की स्थिति तथा जमीन से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच आवश्यक होगी। मध्यप्रदेश में जमीन के स्वामित्व और रिकॉर्ड की पुष्टि खसरा, खतौनी और नक्शे जैसे राजस्व अभिलेखों से की जा सकती है।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जमीन को स्टिंग में सरकारी बताया गया है, वह वास्तव में राजस्व रिकॉर्ड में किस श्रेणी में दर्ज है और क्या उस पर किसी प्रकार का कब्जा अथवा निर्माण हुआ है। इसके अलावा यदि जमीन पर कब्जे की कोई कोशिश हुई है तो स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है।

स्टिंग में प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव होने के कथित दावे ने भी मामले को गंभीर बना दिया है। यदि रिकॉर्डिंग में कही गई बातें सही संदर्भ में मौजूद हैं, तो संबंधित अधिकारियों का पक्ष और वास्तविक प्रशासनिक रिकॉर्ड सामने आना जरूरी होगा। किसी व्यक्ति द्वारा किसी अधिकारी से निकटता या प्रभाव होने का दावा करना और वास्तव में उस अधिकारी का उसके प्रभाव में होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

आस्था और धार्मिक गतिविधियां व्यक्तिगत विश्वास का विषय हो सकती हैं, लेकिन सरकारी भूमि का स्वामित्व और उसका उपयोग कानून एवं राजस्व अभिलेखों से निर्धारित होता है। ऐसे में स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई कथित बातचीत के बाद अब प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी होगी कि संबंधित जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या वहां किसी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध निर्माण हुआ है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि अजयपाल बाबा से जुड़ी कथित बातचीत ने सरकारी जमीन, धार्मिक संस्थान के नाम पर जमीन के इस्तेमाल और प्रशासनिक प्रभाव के दावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन सवालों का अंतिम उत्तर राजस्व रिकॉर्ड, मौके की जांच, संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष और यदि आवश्यक हो तो निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post