श्रमजीवी पत्रकार संघ का एक दिवसीय पत्रकार प्रशिक्षण शिविर राज पैलेस मैं हुआ संपन्न।
पत्रकारिता में तथ्यपरकता और विश्वसनीयता सर्वोपरि-सुमन पुरोहित | एआई के दौर में तकनीक का उपयोग करें,लेकिन तथ्यों का सत्यापन जरूरी-लकी पुरोहित | आरटीआई पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम,जनहित में करें उपयोग-सचिन मिश्रा।
कटनी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ, जिला इकाई कटनी के तत्वावधान में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, बालाघाट के सहयोग से 2 अक्टूबर को राज पैलेस, मंडी रोड में एक दिवसीय पत्रकार प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण शिविर में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से पत्रकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों, समाचार लेखन, तथ्य सत्यापन, स्रोतों की विश्वसनीयता, खोजी पत्रकारिता, सूचना का अधिकार अधिनियम तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के पत्रकारिता में उपयोग को लेकर विशेषज्ञ वक्ताओं ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नेमा, युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज पैलेस की ऑनर सौम्या रांधेलिया, डॉ. ज्योति राजपूत, कटनी डिग्री कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. पारस जैन सहित अन्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उनके विचारों और पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्य एवं जनहित की भूमिका को भी स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के आयोजक एवं मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ, जिला इकाई कटनी के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र राजपूत (पीएचडी गुरु) ने उपस्थित अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं पत्रकार साथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकारों की जिम्मेदारी केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सामने सही, विश्वसनीय और तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करना भी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाचारों की गति बढ़ी है, ऐसे में पत्रकारों के लिए यह और भी आवश्यक हो गया है कि वे किसी भी सूचना को प्रकाशित करने से पहले उसके स्रोत और तथ्यों की पुष्टि करें।
जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुमन पुरोहित ने समाचार लेखन की बारीकियों और पत्रकारिता के मूल स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पत्रकारिता में तथ्यपरकता और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करना आवश्यक है। पत्रकार को समाचार के मूल स्रोत तक पहुंचने, संबंधित पक्षों से जानकारी लेने और विषय के सभी पहलुओं को समझने का प्रयास करना चाहिए।
सुमन पुरोहित ने कहा कि किसी घटना के संबंध में प्राप्त पहली सूचना को अंतिम सत्य मान लेना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं है। समाचार को प्रकाशित करने से पहले संबंधित व्यक्ति, विभाग या अधिकारी का पक्ष जानना, उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करना और तथ्यों का मिलान करना आवश्यक है। उन्होंने समाचार लेखन में भाषा की स्पष्टता, संतुलन और विश्वसनीय स्रोतों की भूमिका पर भी पत्रकारों का मार्गदर्शन किया।
फिल्म मेकर एवं जीवना विजुअल्स के फाउंडर लकी पुरोहित ने वर्तमान दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए पत्रकारों को एआई आधारित तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने ChatGPT, Gemini सहित विभिन्न एआई टूल्स के उपयोग के संबंध में जानकारी साझा की और बताया कि इन तकनीकों का उपयोग समाचार लेखन, जानकारी जुटाने, भाषा सुधारने, सामग्री व्यवस्थित करने और विभिन्न कार्यों में सहायक के रूप में किया जा सकता है।
लकी पुरोहित ने स्पष्ट किया कि एआई पत्रकार के लिए एक उपयोगी तकनीकी साधन हो सकता है, लेकिन इससे प्राप्त जानकारी को बिना जांचे-परखे प्रकाशित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एआई से प्राप्त किसी भी तथ्य, आंकड़े, नाम, तारीख या दावे का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना आवश्यक है। पत्रकार की विश्वसनीयता उसके द्वारा प्रकाशित सामग्री की प्रमाणिकता पर निर्भर करती है, इसलिए तकनीक के उपयोग के साथ पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को बनाए रखना जरूरी है।
एडवोकेट, आरटीआई एक्टिविस्ट एवं पर्यावरण मित्र सचिन मिश्रा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के पत्रकारिता में महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनहित से जुड़े अनेक मामलों में आवश्यक दस्तावेज और आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आरटीआई पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने आरटीआई आवेदन की प्रक्रिया, सूचना प्राप्त करने के अधिकार और जनहित से जुड़े मामलों में इसके जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग की जानकारी साझा की।
सचिन मिश्रा ने कहा कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज पत्रकारिता में किसी मुद्दे की तथ्यात्मक पड़ताल के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। उन्होंने पत्रकारों से आरटीआई का उपयोग व्यक्तिगत विवादों के बजाय जनहित से जुड़े विषयों की पड़ताल और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के उद्देश्य से करने का आह्वान किया।
डॉ. मनोज खरे ने खोजी पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि खोजी पत्रकारिता के लिए विषय का चयन, विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी जुटाना, दस्तावेजों का अध्ययन, तथ्यों का मिलान और विभिन्न पक्षों से जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था पर लगाए गए आरोपों को केवल दावे के आधार पर समाचार का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की गंभीरता से जांच आवश्यक है।
उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि खोजी पत्रकारिता में धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता होती है। किसी भी विषय पर काम करते समय पत्रकार को उपलब्ध जानकारी के साथ-साथ उसके पीछे मौजूद दस्तावेजी प्रमाणों की भी जांच करनी चाहिए, ताकि समाचार प्रकाशित होने के बाद उसकी विश्वसनीयता बनी रहे।
वरिष्ठ पत्रकार आर.बी. गुप्ता ने पत्रकारिता में जनसरोकार और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना और आम लोगों की समस्याओं को उचित मंच प्रदान करना भी है। उन्होंने पत्रकारों से स्थानीय समस्याओं, जनहित के मुद्दों और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता के साथ उठाने की बात कही।
डॉ. ज्योति राजपूत ने पत्रकारों से सकारात्मक सोच के साथ जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज में जागरूकता पैदा करने और लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बदलते सामाजिक परिवेश में पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ, जिला इकाई कटनी के जिला महासचिव अज्जू सोनी ने बदलते दौर में पत्रकारिता के स्वरूप में आए बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया और नई तकनीकों के आने से समाचारों की पहुंच और गति दोनों बढ़ी हैं। ऐसे समय में पत्रकारों को नई तकनीकों के साथ कदमताल करना चाहिए, लेकिन पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक पत्रकारिता को गति दे सकती है, लेकिन समाचार की विश्वसनीयता पत्रकार के सत्यापन और जिम्मेदारी से ही सुनिश्चित होती है।
कटनी डिग्री कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. पारस जैन ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों पर वक्ताओं से संवाद किया तथा उपस्थित पत्रकारों को सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान पत्रकारों ने समाचार लेखन, एआई के उपयोग, आरटीआई, खोजी पत्रकारिता और तथ्य सत्यापन सहित विभिन्न विषयों से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। वक्ताओं ने सवालों के विस्तार से जवाब देते हुए पत्रकारिता के व्यावहारिक पक्षों पर जानकारी दी।
प्रशिक्षण शिविर के दौरान पत्रकारों के लिए संवाद और सहभागिता पर विशेष जोर रहा। विशेषज्ञ वक्ताओं ने केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय पत्रकारिता के क्षेत्र में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों पर भी चर्चा की। वर्तमान डिजिटल दौर में सोशल मीडिया से प्राप्त सूचनाओं की पुष्टि, वायरल सामग्री की सत्यता जांचने और एआई से तैयार सामग्री के सत्यापन जैसे विषय भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से अतिथियों एवं प्रशिक्षकों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। प्रशिक्षण शिविर में शामिल 75 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले पत्रकारों के लिए यह प्रशिक्षण पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीकों की समझ विकसित करने की दिशा में उपयोगी अवसर रहा।
कार्यक्रम में शिक्षाविद रोशनी जैन, समाजसेवी नितिन पांडे, ढीमरखेड़ा तहसील अध्यक्ष लूनेश्वर पुरी, संतोष तोमर,मोनू खान,कृष्णा पटेल, राकेश निषाद, सुशील मिश्रा, गोविन्द गिरी, सुनील दुबे, सपना बर्मन, हिमांशु बर्मन,मुकेश यादव, पीतम बर्मन, राजेश तिवारी,सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार साथी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में आने वाली नई चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर संवाद का वातावरण बना रहा।
प्रमाण-पत्र वितरण के बाद राष्ट्रगान के साथ एक दिवसीय पत्रकार प्रशिक्षण शिविर का औपचारिक समापन किया गया। इसके पश्चात अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं पत्रकार साथियों के लिए स्नेह भोज का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, पत्रकार साथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि पत्रकारिता में निरंतर सीखना और समय के साथ स्वयं को अपडेट रखना आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पत्रकारों को बदलते मीडिया परिवेश में नई तकनीकों और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाने में मदद करते हैं।


