हिंदी भाषा की व्यापकता और वर्तमान चुनौतियों पर हुआ सार्थक विमर्श।
संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान के हिंदी माह महोत्सव 2026 में विशिष्ट व्याख्यान आयोजित,देशभर से शिक्षाविदों एवं हिंदी-संस्कृत प्रेमियों ने ऑनलाइन सहभागिता की।
मध्य प्रदेश। संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान, मध्य प्रदेश प्रान्त द्वारा हिंदी माह महोत्सव 2026 के उपलक्ष्य में 27 सितंबर 2026 को गूगल मीट के माध्यम से “हिंदी भाषा : व्यापकता और विवशता” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम परमपूजनीय कुलगुरु एवं कार्यक्रम संरक्षक आचार्य राधागोविन्द त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान के संरक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा की व्यापकता, वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता, वैश्विक परिदृश्य में उसकी संभावनाओं तथा हिंदी के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर सार्थक एवं विचारोत्तेजक विमर्श करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. प्रभात नारायण पाण्डेय, सहायक प्राध्यापक-ज्योतिष, रामानुज संस्कृत परिषद्, रीवा द्वारा वैदिक मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात माधुरी गर्ग ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सहभागिता की। डॉ. आलोक चन्द्र परिडा ने स्वागत एवं अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. वेद प्रकाश मिश्र, संकायाध्यक्ष, भाषा विभाग, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने अपने उद्बोधन में हिंदी भाषा की व्यापकता, उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ उसके संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी को ज्ञान, संवाद और जनसंचार के प्रभावी माध्यम के रूप में निरंतर विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार द्विवेदी, पोस्ट डॉक्टोरल फेलो एवं अतिथि विद्वान्, मानवविज्ञान विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने “हिंदी भाषा : व्यापकता और विवशता” विषय पर विस्तृत एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी के वर्तमान स्वरूप, सामाजिक स्वीकार्यता, शिक्षा एवं प्रशासन में उसकी भूमिका तथा आधुनिक तकनीकी और वैश्विक परिवेश में हिंदी के सामने उपस्थित विभिन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हिंदी के विकास के लिए भाषा के व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने, उसे नवीन ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने तथा युवा पीढ़ी में हिंदी के प्रति रुचि विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) निलिम्प त्रिपाठी, प्रांताध्यक्ष, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान, मध्य प्रदेश प्रान्त ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने हिंदी को भारतीय सांस्कृतिक चेतना एवं जनसंचार की सशक्त भाषा बताते हुए इसके संरक्षण, संवर्धन और समुचित प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसके व्यापक एवं सार्थक प्रयोग में निहित होती है और हिंदी को नई पीढ़ी तथा आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. नवीन कुमार चौबे, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. तुलसीदास परौहा, प्रान्त उपाध्यक्ष, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान, मध्य प्रदेश प्रान्त ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, सभी विशिष्ट अतिथियों, आयोजकों तथा ऑनलाइन माध्यम से जुड़े प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन ब्रजकिशोर शुक्ला द्वारा शांति पाठ के साथ हुआ।
कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष प्रो. अंजू सेठ, पूर्व प्राचार्या, सत्यवती महाविद्यालय एवं राष्ट्रीय अध्यक्षा, महिला प्रकोष्ठ, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान रहीं। संयोजक के रूप में डॉ. कृष्णकांत भार्गव, राष्ट्रीय सह सचिव, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान; समन्वयिका के रूप में डॉ. गीता दुबे, अध्यक्ष, गुरुकुल प्रकल्प, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान, महाराष्ट्र प्रान्त तथा आयोजन सचिव के रूप में डॉ. आलोक चन्द्र परिडा, प्रान्त मंत्री, संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान, मध्य प्रदेश प्रान्त ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा हिंदी-संस्कृत प्रेमियों ने ऑनलाइन सहभागिता की। वक्ताओं ने हिंदी भाषा की व्यापकता, उसकी समकालीन उपयोगिता, सामाजिक एवं शैक्षणिक भूमिका तथा बदलते तकनीकी और वैश्विक परिवेश में उसके सामने उपस्थित चुनौतियों पर विचार रखे।
समग्र रूप से हिंदी माह महोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित यह विशिष्ट व्याख्यान हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उसके व्यापक एवं व्यावहारिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय भाषायी एवं सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ उसके भविष्य की संभावनाओं पर भी ज्ञानवर्धक एवं सार्थक विमर्श हुआ।


