कछार गांव बड़ा और सिलौंडी में जैन समाज प्रभु की भक्ति में लीन,नशामुक्ति को लेकर पुलिस चौकी प्रभारी को सौंपा ज्ञापन।

 कछार गांव बड़ा और सिलौंडी में जैन समाज प्रभु की भक्ति में लीन,नशामुक्ति को लेकर पुलिस चौकी प्रभारी को सौंपा ज्ञापन।

दश लक्षण पर्व के दौरान सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जैन समाज ने उठाई आवाज,अवैध मांस-मदिरा दुकानों पर कार्रवाई की मांग।

सिलौंडी। कछार गांव बड़ा और सिलौंडी क्षेत्र में इन दिनों जैन समाज के लोग दश लक्षण पर्व के अवसर पर भगवान की भक्ति और आत्मसाधना में लीन हैं। दस दिवसीय इस धार्मिक पर्व के दौरान समाज के लोग नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना एवं आत्मचिंतन करते हुए संयम और सदाचार का संदेश दे रहे हैं। इसी के साथ जैन समाज द्वारा सामाजिक बुराइयों को दूर करने तथा क्षेत्र में बेहतर सामाजिक वातावरण बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है।

जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य एवं कछार गांव बड़ा के सरपंच कैलाश चंद्र जैन ने बताया कि दश लक्षण पर्व आत्मसाधना और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दौरान समाज के लोग दस दिनों तक भगवान की भक्ति के साथ अपने आचरण में संयम, त्याग और सद्भावना को अपनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज सदैव अहिंसा, संयम और सामाजिक सद्भाव के साथ समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए प्रयासरत रहा है।

इसी सामाजिक भावना के तहत क्षेत्र में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और इससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं को लेकर जैन समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस चौकी सिलौंडी में पहुंचकर चौकी प्रभारी अनिल पांडे को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्र में नशामुक्ति की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने तथा मांस-मदिरा की अवैध दुकानों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद कराने की मांग रखी गई।

ज्ञापन सौंपने वालों में कछार गांव बड़ा के वरिष्ठ सरपंच कैलाश चंद्र जैन, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष शैलेश जैन, सोशल मीडिया प्रभारी धीरज जैन और रितेश जैन शामिल रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि नशे की आदत का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवार और पूरे सामाजिक वातावरण पर पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस के साथ समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

जैन समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र में यदि कहीं अवैध रूप से मांस एवं मदिरा की बिक्री की जा रही है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने और सामाजिक संगठनों को भी इसमें सहभागी बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएं।

दश लक्षण पर्व के दौरान धार्मिक आस्था और आत्मसाधना के साथ सामाजिक सरोकारों को लेकर जैन समाज द्वारा उठाया गया यह कदम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। समाज के लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में सदाचार, संयम, अहिंसा और नशामुक्ति जैसे सकारात्मक संदेशों को बढ़ावा देना भी होना चाहिए।

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