दशलक्षण पर्व पर भक्ति में डूबा सिलौंडी और कछार गांव बड़ा,मंदिरों में गूंज रही पूजा-अर्चना की स्वर लहरियां।

 दशलक्षण पर्व पर भक्ति में डूबा सिलौंडी और कछार गांव बड़ा,मंदिरों में गूंज रही पूजा-अर्चना की स्वर लहरियां।

अभिषेक,शांतिधारा,पूजन-अर्चन और आरती के साथ धर्म आराधना में जुटा जैन समाज,स्कूली बच्चे भी मंदिर में पूजा के बाद जा रहे स्कूल।

सिलौंडी। दशलक्षण पर्व के अवसर पर सिलौंडी और कछार गांव बड़ा में जैन समाज के लोगों में विशेष धार्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। पर्व के दौरान सुबह से ही जैन मंदिरों में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन-अर्चन और आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से भगवान की आराधना कर रहे हैं और दशलक्षण धर्म के माध्यम से आत्मशुद्धि तथा कर्मों की निर्जरा का प्रयास कर रहे हैं।

दशलक्षण पर्व जैन धर्म में आत्मसंयम, तप, त्याग और सदाचार की साधना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दौरान जैन समाज के श्रद्धालु दस धर्मों का स्मरण करते हुए अपने जीवन में क्षमा, विनम्रता, सत्य, संयम, त्याग और आत्मचिंतन जैसे गुणों को अपनाने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन धर्मों की साधना के माध्यम से आत्मा को कर्मों के बंधन से मुक्त करने की दिशा में साधना की जाती है।

पर्व के दौरान क्षमा और अहंकार का त्याग विशेष रूप से जीवन में उतारने का संदेश दिया जा रहा है। सभी जीवों के प्रति क्षमा भाव रखना तथा अहंकार से दूर रहना धर्म साधना की महत्वपूर्ण सीढ़ियां मानी जाती हैं। इसी भावना के साथ समाज के लोग धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं।

दशलक्षण पर्व का प्रभाव बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। स्कूली बच्चे नियमित रूप से सुबह मंदिर पहुंचकर भगवान का पूजन-अर्चन करने के बाद ही स्कूल के लिए रवाना हो रहे हैं। इससे नई पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों और अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव देखने को मिल रहा है।

वहीं पर्व के दौरान जैन समाज के अनेक श्रद्धालु एकासन व्रत का पालन कर रहे हैं। श्रद्धालु 24 घंटे में एक बार ही भोजन और पानी ग्रहण करते हुए आत्मसंयम तथा तप की साधना कर रहे हैं। कई श्रद्धालु अपनी क्षमता और संकल्प के अनुसार उपवास एवं अन्य धार्मिक नियमों का पालन कर रहे हैं।

दिन के समय मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रात्रि में भी धार्मिक गतिविधियां जारी रहती हैं। रात में आरती, स्वाध्याय और धर्म चर्चा के माध्यम से श्रद्धालु दशलक्षण पर्व के धार्मिक महत्व को समझने और आत्मचिंतन करने में समय व्यतीत कर रहे हैं।

सिलौंडी और कछार गांव बड़ा में दशलक्षण पर्व के चलते जैन मंदिरों में सुबह से लेकर रात तक धार्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं की नियमित सहभागिता और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी से पर्व की धार्मिक छटा देखते ही बन रही है। समाजजन दशलक्षण पर्व के माध्यम से आत्मसंयम, सद्भाव, क्षमा और त्याग का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

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