योगी मॉडल की तर्ज पर मप्र में अधिवक्ता कल्याण की आवाज,सिहोरा से शुरू हुई पहल।

 योगी मॉडल की तर्ज पर मप्र में अधिवक्ता कल्याण की आवाज,सिहोरा से शुरू हुई पहल।

अध्यक्ष रविदीप सिंह बैस की अगुवाई में तहसील अधिवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन,स्वास्थ्य बीमा से लेकर चैंबर,पार्किंग और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग।

सिहोरा। उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए हाल ही में की गई कल्याणकारी घोषणाओं के बाद अब मध्यप्रदेश में भी अधिवक्ता समुदाय के लिए बेहतर स्वास्थ्य, कार्यस्थल और तकनीकी सुविधाओं की मांग उठने लगी है। इसी क्रम में तहसील अधिवक्ता संघ सिहोरा, जिला जबलपुर ने अध्यक्ष रविदीप सिंह बैस की अगुवाई में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए व्यापक कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ता संघ ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे आम नागरिकों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य, कार्यस्थल और आधुनिक तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर ठोस व्यवस्थाएं किया जाना आवश्यक है।

संघ ने उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए की गई हालिया घोषणाओं का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा की घोषणा की थी। इसके साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराने तथा अधिवक्ता कल्याण निधि से मिलने वाली सहायता को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने की जानकारी दी गई थी।

इन्हीं सुविधाओं को आधार बनाते हुए तहसील अधिवक्ता संघ सिहोरा ने मध्यप्रदेश में भी अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा लागू किए जाने की मांग रखी है। संघ का कहना है कि अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था होने से उन्हें और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी अथवा आकस्मिक चिकित्सा परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

ज्ञापन में न्यायालय परिसरों में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। संघ ने न्यायालयों में अधिवक्ताओं और पक्षकारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवश्यकतानुसार बहुस्तरीय पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए नए चैंबर उपलब्ध कराने तथा मौजूदा चैंबरों में आवश्यक फर्नीचर और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

अधिवक्ता संघ ने न्यायिक कार्यप्रणाली को आधुनिक और अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में भी कदम उठाने की मांग की है। इसके तहत अधिवक्ताओं और विधि अधिकारियों को आवश्यकतानुसार टैबलेट तथा अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है, ताकि न्यायालयीन कार्य में तकनीक का बेहतर उपयोग हो सके और दस्तावेजों के डिजिटल आदान-प्रदान तथा पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिले।

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर और अन्य सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख सामने आया है। इसी तर्ज पर सिहोरा अधिवक्ता संघ ने मध्यप्रदेश में भी न्यायालय परिसरों के बुनियादी ढांचे को अधिवक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि अधिवक्ता केवल न्यायालय में पैरवी करने वाला वर्ग नहीं, बल्कि आम नागरिक और न्याय व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए उनके लिए बेहतर कार्यस्थल, स्वास्थ्य सुरक्षा और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता न्याय व्यवस्था को भी अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो सकती है।

तहसील अधिवक्ता संघ सिहोरा ने शासन से मांग की है कि प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा, अधिवक्ता चैंबर, पार्किंग, डिजिटल संसाधन तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर एक व्यापक नीति तैयार की जाए। संघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिवक्ता समुदाय के हित में आवश्यक निर्णय लेगी।

अध्यक्ष रविदीप सिंह बैस की अगुवाई में सिहोरा से उठी यह मांग फिलहाल प्रदेश सरकार के समक्ष ज्ञापन के रूप में रखी गई है। अब इस पर शासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

इस पहल में अध्यक्ष रविदीप सिंह बैस के साथ सचिव आनंदमणि त्रिपाठी, उपाध्यक्ष मुकेश कुमार मिश्रा, सह-सचिव आशीष व्योहार, आलोक व्योहार, सुनील पटेल, आनंद कुमार पटेल, अभय नारायण मिश्रा, साकेत पिंडिया, नागेश उपाध्याय, रमेश पटेल, मनोज दुबे, अंकुर जैन, कन्हैया, अनेक तिवारी, कान्हा पांडे सहित अनेक अधिवक्ताओं की सहभागिता रही।चाहें तो ।

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