पौधों को राखी बांध लिया सुरक्षा का संकल्प,सिलौंडी में रक्षाबंधन पर अनूठी पहल।
उप तहसील एवं हल्का नर्सरी में वर्षों से चल रही पर्यावरण संरक्षण की मुहिम,हजारों पेड़-पौधे बढ़ा रहे हरियाली।
सिलौंडी। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, स्नेह और एक-दूसरे की सुरक्षा के संकल्प का पर्व माना जाता है। इसी भावना को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए सिलौंडी में एक अनूठी पहल देखने को मिली। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रक्षाबंधन के अवसर पर सिलौंडी उप तहसील भवन परिसर स्थित नर्सरी एवं हल्का नर्सरी में पेड़-पौधों को राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान पौधों को राखी बांधते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य लोगों में पेड़-पौधों के प्रति अपनत्व की भावना पैदा करना और उन्हें यह समझाना है कि जिस प्रकार परिवार के सदस्यों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होती है, उसी प्रकार पेड़-पौधों की सुरक्षा और देखभाल भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के संरक्षक एवं सचिव कुंजबिहारी चनपुरिया ने बताया कि सिलौंडी क्षेत्र में लंबे समय से पौधों के संरक्षण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर हर वर्ष पौधों को राखी बांधकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया जाता है। उन्होंने बताया कि हल्का नर्सरी में वर्ष 2000 से लगभग 2000 पेड़-पौधे हरे-भरे हैं, जो लगातार क्षेत्र की हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
सचिव कुंजबिहारी चनपुरिया ने बताया कि इसी क्रम में वर्ष 2019 से सिलौंडी उप तहसील नर्सरी में भी लगभग 700 पेड़-पौधे सुरक्षित एवं हरे-भरे हैं। इन पौधों की देखभाल और संरक्षण के कारण नर्सरी परिसर में हरियाली का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन पौधों को केवल पौधे नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की अमूल्य धरोहर के रूप में देखना चाहिए।
कुंजबिहारी चनपुरिया ने कहा कि पेड़-पौधे मानव जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं। स्वच्छ हवा, पर्यावरण का संतुलन, वर्षा चक्र और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पौधों को लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल करना है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर पौधों को राखी बांधने का उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि प्रकृति की रक्षा के लिए भावनात्मक जुड़ाव भी आवश्यक है।
इस अवसर पर भाजपा जिला मंत्री डॉ. प्रशांत राय, सिलौंडी उपसरपंच राहुल राय, संरक्षक एवं सचिव कुंजबिहारी चनपुरिया, अतरसुमा सरपंच सुशील परस्ते, धीरज जैन एवं ओमप्रकाश सहित अन्य उपस्थित लोगों ने पेड़-पौधों को राखी बांधी। सभी ने पौधों की सुरक्षा, संरक्षण एवं नियमित देखभाल की जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। लगातार कम होते वन क्षेत्र, बढ़ता प्रदूषण और बदलता पर्यावरण मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। ऐसे में छोटी-छोटी पहल भी समाज में बड़ा संदेश देने का काम करती हैं। सिलौंडी में रक्षाबंधन पर पौधों को राखी बांधने की पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
सचिव कुंजबिहारी चनपुरिया ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधे की जिम्मेदारी लेकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों को पेड़ बनने तक उनकी देखभाल करने की अपील की।
सिलौंडी की दोनों नर्सरियों में वर्षों से सुरक्षित और हरे-भरे पेड़-पौधे इस बात का उदाहरण हैं कि यदि पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण किया जाए तो वे आने वाले लंबे समय तक प्रकृति को समृद्ध करने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्व की भावना को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
इस अनूठे आयोजन के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। पौधों को राखी बांधकर लिया गया यह संकल्प आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लोगों को प्रेरित करने वाला कदम साबित हो सकता है। सिलौंडी में आयोजित यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के पर्व को एक नई सामाजिक और पर्यावरणीय भावना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।


