कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी के जन्मदिवस पर वैदिक संस्कृति,पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संगम।

 कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी के जन्मदिवस पर वैदिक संस्कृति,पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संगम।

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन,1100 से अधिक प्रतिभागियों ने की सहभागिता।

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय में कुलाधिपति वेदविद्या मार्तण्ड ब्रह्मचारी गिरीश जी के जन्मदिवस के पावन अवसर पर वैदिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विविध कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के साथ छात्र-छात्राओं सहित लगभग 1100 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। संपूर्ण आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-भक्ति, वैदिक संस्कृति, गो-संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश से ओत-प्रोत रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुसार गुरु पूजन से हुआ। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार तिवारी के मार्गदर्शन एवं सान्निध्य में गुरु पूजन संपन्न कराया गया। विश्वविद्यालय के उत्थान तथा कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं मंगलमय जीवन की कामना से ब्रिजेश मिश्रा के संचालन में हनुमान चालीसा का 11 बार अखंड पाठ किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में कुलसचिव संदीप शर्मा, प्राध्यापकगण, सहायक प्राध्यापकगण, अशैक्षणिक कर्मचारी तथा 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की।

इसी क्रम में डॉ. आजाद सिंह के संचालन में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलाधिपति जी के जन्मदिवस को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत 21 फलदार पौधों का रोपण किया गया। कुलगुरु, कुलसचिव, अतिथियों, शिक्षक समुदाय, अशैक्षणिक कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रमों की श्रृंखला में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। संगोष्ठी के प्रारंभ में वैदिक आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्षों द्वारा अतिथियों एवं विद्वज्जनों का पारंपरिक रूप से तिलक, माल्यार्पण, शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के कुलसचिव संदीप शर्मा ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी के जन्मदिवस को विश्वविद्यालय परिवार के लिए प्रेरणादायी एवं गौरवपूर्ण अवसर बताया।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि सुनील मान सिंह, गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र, देवलापुर, नागपुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक चिंतन तथा गो-विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। सारस्वत वक्ता जितेंद्र भकने ने पर्यावरण एवं गोमाता की रक्षा और संरक्षण के लिए समाज को प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा तथा विश्वविद्यालय के उद्देश्यों की सराहना करते हुए कुलाधिपति के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना की।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार तिवारी ने कहा कि कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी का जीवन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा एवं मानव कल्याण की भावना के प्रति समर्पित है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैदिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने तथा राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु ने ब्राह्मनाभि में अनेक रोगों को दूर करने की शक्ति निहित होने की बात कही और जीवन में सरल एवं सहज उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में गौमाता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि श्रद्धापूर्वक गौमाता को प्रणाम करना समस्त देवी-देवताओं को प्रणाम करने के समान है। उन्होंने गौमाता को सनातन संस्कृति और जीवन-पद्धति का महत्वपूर्ण आधार बताया।

कुलगुरु ने नैतिकता के विषय पर कहा कि हमें दूसरों से नहीं, बल्कि अनैतिकता से खतरा है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में नैतिक मूल्यों, सदाचार और संस्कारों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने आगामी गणेश उत्सव एवं दीपावली पर्व पर गोबर से निर्मित दीपकों का अधिक से अधिक उपयोग करने का संकल्प लिया। इसके माध्यम से भारतीय परंपरा, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वदेशी जीवन-पद्धति को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

संगोष्ठी का मंच संचालन उमाकांत त्रिपाठी ने किया, जबकि संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राघवेन्द्र सिंह कलचुरी रहे। कार्यक्रम के अंत में अरविंद सिंह प्रभारी महर्षि वेद विज्ञान विभाग ने कृतज्ञता एवं आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, कुलगुरु, कुलसचिव, शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इसके पश्चात वैदिक आचार्यों द्वारा शांति पाठ कराया गया और विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार तिवारी द्वारा विश्वविद्यालय की आज्ञा एवं निर्देशानुसार संगोष्ठी एवं कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई। अंत में डॉ. नित्येश्वर चतुर्वेदी एवं डॉ. आलोक चंद्र परिडा के संचालन में सभी उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया गया।

कार्यक्रम में माननीय कुलगुरु प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार तिवारी जी, जितेंद्र भकने सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। समूचा आयोजन आध्यात्मिक श्रद्धा, गुरु-भक्ति, वैदिक संस्कृति, गो-संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाला रहा। विश्वविद्यालय परिवार ने कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सतत मार्गदर्शन की मंगलकामना की।

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