अवैध शराब पैकारियों के खिलाफ महनेर-मडेरा की महिलाओं का हल्लाबोल,थाने से तहसील तक पहुंचा विरोध।

 अवैध शराब पैकारियों के खिलाफ महनेर-मडेरा की महिलाओं का हल्लाबोल,थाने से तहसील तक पहुंचा विरोध।

विधायक के पत्र और थाना प्रभारी को दिए निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप,महिलाओं ने सौंपा ज्ञापन,चंद्रकांत चौरसिया ने दी बड़े जनआंदोलन की चेतावनी।

उमरिया पान। क्षेत्र में कथित अवैध शराब पैकारियों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम महनेर और मडेरा की महिलाओं ने चंद्रकांत चौरसिया के नेतृत्व में अवैध शराब पैकारियों को तत्काल बंद कराने की मांग को लेकर उमरिया पान थाना प्रभारी के नाम पुलिस थाने में तथा मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम नायब तहसीलदार उमरिया पान को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा और नाराजगी रखी। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से कथित रूप से अवैध शराब की पैकारियां संचालित हो रही हैं, लेकिन शिकायतों और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। महिलाओं का कहना है कि अवैध शराब की उपलब्धता से गांवों का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्रामीण परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार इस मामले को लेकर पहले भी क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह के समक्ष शिकायत रखी जा चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि 13 अगस्त को तिरंगा यात्रा के दौरान कुछ ग्रामीणों ने विधायक श्री सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए क्षेत्र में संचालित बताई जा रही अवैध शराब पैकारियों को तत्काल बंद कराने की मांग की थी। ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित उमरिया पान थाना प्रभारी महेंद्र जायसवाल को तत्काल अवैध शराब पैकारियां बंद कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी ग्रामीणों का आरोप है कि आज दिनांक तक कथित पैकारियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

इसी मामले को लेकर विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षक कटनी को भी पत्र प्रेषित किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्रीय विधायक ने स्वयं मामले में संज्ञान लेकर पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा और थाना प्रभारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है। ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर विधायक के पत्र और निर्देशों का भी असर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।

इसी कथित निष्क्रियता से नाराज ग्राम महनेर और मडेरा की महिलाओं ने अब स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। महिलाओं ने चंद्रकांत चौरसिया के साथ उमरिया पान पुलिस थाने पहुंचकर थाना प्रभारी के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार उमरिया पान को सौंपकर पूरे मामले में उच्च स्तर से हस्तक्षेप करने की मांग की गई। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने क्षेत्र में कथित रूप से संचालित अवैध शराब पैकारियों की जांच कर उन्हें तत्काल बंद कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग रखी।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांवों में शराब की आसानी से उपलब्धता केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव परिवारों और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ता है। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि केवल कागजी कार्रवाई तक मामला सीमित न रहे, बल्कि मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में अवैध रूप से शराब की बिक्री या पैकारी हो रही है तो उसके स्रोत तक पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लग सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान चंद्रकांत चौरसिया ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अतिशीघ्र कथित अवैध शराब पैकारियां पूर्णतः बंद नहीं कराई गईं तो ग्रामीण महिलाएं आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और बार-बार शिकायतों के बाद भी यदि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं तो ग्रामीणों के पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर आसपास के गांवों की बड़ी संख्या में महिलाओं को एकत्रित कर व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति निर्मित होने पर इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

चंद्रकांत चौरसिया ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीणों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्र में कथित अवैध शराब कारोबार पर रोक लगवाना है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या को लेकर परेशान हैं और अब महिलाएं भी इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं।

ज्ञापन प्राप्त करते हुए नायब तहसीलदार इसरार खान ने कहा कि ज्ञापन प्राप्त हुआ है और इसे उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों की ओर से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। नायब तहसीलदार के इस जवाब के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल ज्ञापन आगे भेजे जाने का आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि वे चाहते हैं कि प्रशासन मामले की गंभीरता को समझते हुए मौके पर जांच करे और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे।

वहीं इस पूरे मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि जब ग्रामीणों ने पहले विधायक के समक्ष शिकायत रखी, विधायक द्वारा मामले में संज्ञान लिया गया, पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई और थाना प्रभारी को भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए, तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि कथित अवैध शराब पैकारियों की शिकायत निराधार है तो प्रशासन जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता और यदि शिकायत में तथ्य पाए जाते हैं तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? इन सवालों का जवाब अब पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से ही सामने आएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं द्वारा लगातार शिकायत करने के बावजूद यदि समस्या का समाधान नहीं होता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप और बड़ा हो सकता है। महनेर और मडेरा के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में शराब की बिक्री और पैकारी से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि यदि कहीं अवैध रूप से शराब पहुंचाई या बेची जा रही है तो उसके पीछे कौन लोग हैं और शराब की आपूर्ति का स्रोत क्या है।

महिलाओं के इस विरोध ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन का दायित्व केवल शिकायत प्राप्त करना नहीं, बल्कि शिकायत के तथ्यों की जांच कर कानून के अनुरूप कार्रवाई करना भी है। ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को किस गंभीरता से लेता है और कितनी जल्दी जांच की प्रक्रिया शुरू होती है।

फिलहाल महनेर और मडेरा की महिलाओं द्वारा सौंपा गया ज्ञापन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर ग्रामीण कथित अवैध शराब पैकारियों को पूरी तरह बंद कराने की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने ज्ञापन को उच्च स्तर तक पहुंचाकर प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या इस बार ग्रामीण महिलाओं की शिकायत पर जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखाई देगी या फिर यह मामला भी आवेदन और आश्वासन की औपचारिक प्रक्रिया तक ही सीमित रह जाएगा।

ग्रामीणों के इस विरोध के बाद अब पुलिस और प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ कथित अवैध शराब पैकारियों की शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाना और दूसरी तरफ यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई करना। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि महनेर और मडेरा की महिलाओं द्वारा उठाई गई आवाज का समाधान निकलता है या फिर उन्हें अपनी मांगों को लेकर व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post