काशी में गंगा का रौद्र रूप, तेजी से बढ़ रहा जलस्तर; नमो घाट तक पहुंचा पानी, निचले इलाकों में बढ़ी चिंता।
घाटों पर मंडराया बाढ़ का खतरा, वरुणा किनारे घरों में घुसा पानी; नाव संचालन पर भी रोक, प्रशासन अलर्ट।
वाराणसी। सावन के बाद काशी में एक बार फिर मां गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों से लेकर नदी किनारे बसे निचले इलाकों तक चिंता बढ़ा दी है। 18 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार वाराणसी में गंगा का जलस्तर 66.72 मीटर तक पहुंच गया था और पानी लगभग 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। इसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।
गंगा के बढ़ते पानी का असर वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। घाटों की निचली सीढ़ियां लगातार पानी में समाती जा रही हैं और नदी का पानी नमो घाट तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में नमो घाट तथा आसपास के क्षेत्रों में बढ़े जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। हालांकि नमो घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, इस दावे को प्रशासनिक आंकड़े के बिना पूर्ण रूप से कहना उचित नहीं होगा।
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि का सबसे गंभीर असर वरुणा नदी के आसपास के निचले क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। गंगा का पानी बढ़ने के साथ वरुणा में भी पानी का दबाव बढ़ रहा है, जिसके चलते नदी किनारे बसे कुछ इलाकों में पानी घरों तक पहुंचने की सूचना है। इससे स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है।
स्थिति को देखते हुए वाराणसी में गंगा में नाव संचालन भी एहतियात के तौर पर रोक दिया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग जलस्तर, नदी के बहाव तथा मौसम की परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नाव संचालन रोकने का फैसला लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच नदी में उतरना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
वाराणसी के घाटों पर भी जलस्तर बढ़ने का असर साफ दिखाई दे रहा है। गंगा के बढ़ते पानी के कारण घाटों पर होने वाली सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नदी के किनारे बने छोटे मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों तक पानी पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं। दशाश्वमेध और अन्य प्रमुख घाटों पर भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।
मौसम की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय बना हुआ है और 19 अगस्त से आने वाले दिनों में कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश तथा ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी का असर गंगा के जलस्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी हो गया है।
हालांकि वर्तमान स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर कई वीडियो और दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें कुछ वीडियो में नमो घाट सहित वाराणसी के घाटों पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रत्येक वीडियो को वर्तमान स्थिति का मान लेना उचित नहीं है। पिछले वर्ष 2025 में भी वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था और उस दौरान सभी 84 घाट जलमग्न हो गए थे। इसलिए पुराने वीडियो भी वर्तमान बाढ़ की तस्वीर बताकर साझा किए जा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गंगा का जलस्तर वास्तव में बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी पहुंचने की स्थिति सामने आई है। हालांकि अभी उपलब्ध ताजा जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि वाराणसी के बड़ी संख्या में गांव पूरी तरह डूब चुके हैं। इसलिए गांवों की संख्या या प्रभावित लोगों की संख्या से जुड़ी कोई भी जानकारी प्रशासनिक पुष्टि के बाद ही प्रकाशित किया जाना अधिक उचित होगा।
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने काशीवासियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। घाटों पर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ नाविकों, दुकानदारों, तीर्थयात्रियों और नदी किनारे रहने वाले लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से नदी के किनारे तथा पानी से भरे क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की जा रही है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आने वाले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं। यदि बारिश का दौर जारी रहता है और ऊपर से आने वाले पानी का दबाव बढ़ता है, तो निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के साथ आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
फिलहाल काशी में मां गंगा के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है। नमो घाट तक पहुंचता पानी, घाटों की डूबती सीढ़ियां, वरुणा किनारे निचले इलाकों में घुसता पानी और नाव संचालन पर रोक इस बात के संकेत हैं कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखना जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर जारी होने वाले अगले जलस्तर के आंकड़े और आने वाले दिनों की बारिश ही यह तय करेगी कि वाराणसी में बाढ़ की स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।


