उमरिया पान बस स्टैंड में गंदगी का अंबार,शिकायतों के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल।
जिम्मेदारों की अनदेखी पर उठे सवाल,बारिश के मौसम में संक्रमण का खतरा,ग्रामीणों ने सरपंच और सरपंच पुत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल।
उमरिया पान। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उमरिया पान में इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्राम पंचायत का प्रमुख और व्यस्ततम बस स्टैंड गंदगी और कचरे के ढेर से घिरा नजर आ रहा है। यहां प्रतिदिन आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है, लेकिन इसके बावजूद सफाई व्यवस्था की बदहाली जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बस स्टैंड क्षेत्र में लंबे समय से नियमित साफ-सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कचरा जमा है। बारिश के मौसम में यही गंदगी और अधिक परेशानी का कारण बन रही है। कचरे के ढेर के आसपास पानी जमा होने तथा दुर्गंध फैलने से मच्छरों और अन्य संक्रमण फैलाने वाले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बस स्टैंड पर आने-जाने वाले यात्रियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार स्वच्छता को लेकर पंचायत स्तर पर कई बार शिकायत और मौखिक रूप से जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। सवाल यह है कि जब बार-बार शिकायतें सामने आ रही हैं तो आखिर सफाई व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की जा रही है?
उमरिया पान ग्राम पंचायत को क्षेत्र की बड़ी ग्राम पंचायतों में गिना जाता है और पंचायत में विकास कार्यों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राशि भी आती है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थान पर इस तरह गंदगी का पसरा होना पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित सफाई की व्यवस्था है और सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय है, तो फिर बस स्टैंड जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर गंदगी का यह आलम क्यों दिखाई दे रहा है?
कुछ ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की व्यवस्थाओं को लेकर सरपंच और सरपंच पुत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पंचायत के कई मामलों में सरपंच पुत्र का हस्तक्षेप रहता है और इसी के चलते पंचायत की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करें और सार्वजनिक रूप से बताएं कि बस स्टैंड सहित पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई की व्यवस्था किस प्रकार संचालित की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल सफाई व्यवस्था पर होने वाले खर्च को लेकर भी उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है और सफाई के लिए पंचायत स्तर पर व्यवस्था मौजूद है, तो फिर मौके पर नियमित सफाई क्यों नहीं दिखाई देती? क्या सफाई कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और कार्य की निगरानी की जा रही है? इन सवालों का जवाब पंचायत के जिम्मेदारों को देना चाहिए।
बारिश के मौसम में स्वच्छता को लेकर प्रशासन और सरकार लगातार जागरूकता अभियान चलाते हैं। ऐसे समय में किसी प्रमुख बस स्टैंड पर कचरे का अंबार लगा रहना स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता है। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उमरिया पान बस स्टैंड की स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण करें। पंचायत में सफाई व्यवस्था के लिए उपलब्ध संसाधनों, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति तथा सफाई कार्य पर होने वाले व्यय की भी जांच की जाए। साथ ही बस स्टैंड सहित प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर नियमित सफाई सुनिश्चित कराई जाए, ताकि ग्रामीणों और यात्रियों को गंदगी एवं संभावित संक्रमण के खतरे से राहत मिल सके।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायतों और सामने आई तस्वीरों के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच तथा सरपंच पुत्र इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या उमरिया पान बस स्टैंड की बदहाल सफाई व्यवस्था में कोई ठोस सुधार दिखाई देता है। फिलहाल ग्रामीणों के बीच यही सवाल चर्चा में है कि जब सरकार स्वच्छता को प्राथमिकता दे रही है, तो उमरिया पान के प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर गंदगी का यह अंबार आखिर कब साफ होगा?


