सायना महाविद्यालय में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया व्यास पूजन।
गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर,गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं,दयाशंकर मिश्र।
कटनी। सायना इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, कटनी में भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान प्रकट करते हुए व्यास पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महर्षि वेदव्यास के जीवन, उनके महान साहित्यिक एवं धार्मिक योगदान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणापाणि सरस्वती एवं भगवान वेदव्यास की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। बीबीए के छात्र प्रशांत ने विधि-विधानपूर्वक पूजन कराया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत सायना महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सी. राजेश कुमार द्वारा शाल एवं श्रीफल भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांत संगठन मंत्री दयाशंकर मिश्र मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. चित्रा प्रभात, प्राचार्य शासकीय कन्या महाविद्यालय कटनी तथा मोहन नागवानी, संचालक शिकागो पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल कटनी उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता दयाशंकर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और जीवन में सही दिशा के साथ संस्कार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह शिष्य के व्यक्तित्व निर्माण का मार्गदर्शक भी होता है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यास पूजन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और महान गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। महर्षि वेदव्यास ने भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्यास पूजन हमें अपनी गौरवशाली परंपराओं से जुड़ने तथा उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है।
मुख्य अतिथि डॉ. चित्रा प्रभात ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से विद्यार्थी न केवल अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों के प्रति सदैव सम्मान और कृतज्ञता का भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित मोहन नागवानी ने महर्षि वेदव्यास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के महान स्तंभ हैं। उनके जीवन एवं कार्यों से हमें ज्ञान अर्जित करने के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर सायना महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सी. राजेश कुमार ने भी गुरु की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ संस्कार, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का समावेश हो।
कार्यक्रम के दौरान महर्षि वेदव्यास के जीवन, उनके द्वारा किए गए महान साहित्यिक एवं धार्मिक कार्यों तथा गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थितजनों ने भारतीय गुरु परंपरा को आगे बढ़ाने तथा समाज में ज्ञान, संस्कार और सद्भावना के प्रसार का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में डॉ. सी.ए. लियोनी, प्रो. आर. अबिरामी, याशिका तिवारी, शरद यादव, अरुण उरमलिया, हीरालाल केवट, सत्यवीर सिंह, दोलन रॉय, संगीता मिश्रा, रुचिता लूनावत, नेहा सिंह, श्वेता चांदवानी, प्रशांत सोनी, माला रोहरा, सौरभ सेन सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन शरद यादव ने किया। अंत में डॉ. सी.ए. लियोनी ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन के पश्चात मंगल आरती की गई तथा उपस्थितजनों को प्रसाद का वितरण किया गया।


