असम में बाढ़ का प्रलयंकारी कहर,7 जिले अब भी जलमग्न,मृतकों की संख्या 82 पहुँची।
लगातार बारिश और उफनती नदियों ने बढ़ाई मुश्किलें,करीब 1.9 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित,राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी।
असम में इस वर्ष आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश और राज्य की प्रमुख नदियों के उफान के कारण कई क्षेत्रों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य के सात जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1.9 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं। हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ का पानी अभी भी कई गांवों और कस्बों में भरा हुआ है। अनेक सड़कें, पुल और संपर्क मार्ग जलमग्न होने से लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार वैकल्पिक मार्गों और नावों के माध्यम से प्रभावित इलाकों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
बाढ़ के कारण सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिला है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है। धान, सब्जियों और अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। पशुपालकों को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा है और उनके लिए चारे की व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है।
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार बचाव अभियान चला रही हैं। नावों और अन्य विशेष उपकरणों की सहायता से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों, कपड़ों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की जा रही है। चिकित्सा दल भी लगातार शिविरों का दौरा कर लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं ताकि जलजनित बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।
मौसम विभाग ने भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। इसके चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा अधिक है, वहां रहने वाले लोगों से प्रशासन ने सतर्क रहने तथा आवश्यक होने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक घोषणाओं और अन्य माध्यमों से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
बाढ़ का असर केवल आवागमन और आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। कई विद्यालयों में पानी भर जाने के कारण शिक्षण कार्य बाधित हुआ है। कुछ स्थानों पर राहत शिविर विद्यालयों में संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में भी लोगों को कठिनाई हो रही है, हालांकि प्रशासन ने मोबाइल मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया है।
इस बीच सोशल मीडिया पर "असम के 7 जिलों में मौत का तांडव" जैसे संदेश और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। हालांकि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सात जिले वर्तमान में बाढ़ से प्रभावित हैं और पूरे बाढ़ संकट के दौरान राज्य में मृतकों की संख्या 82 तक पहुंची है। इसलिए किसी भी वायरल पोस्ट या वीडियो को बिना पुष्टि के सच मानना उचित नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।
मुख्यमंत्री और राज्य सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। प्रभावित जिलों के अधिकारियों को राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाना, सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य जनजीवन बहाल करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की घटनाएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। ऐसे में दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन, नदी तटों की सुरक्षा, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और आपदा पूर्व तैयारी को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। फिलहाल असम के लाखों लोगों की निगाहें मौसम के सुधरने और बाढ़ के पानी के उतरने पर टिकी हुई हैं, ताकि वे एक बार फिर सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।


