फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र मामले में सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत पदावनत।
विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित,सहायक ग्रेड-3 से भृत्य पद पर प्रत्यावर्तन,वर्ष 2019 में मिला प्रथम समयमान वेतनमान भी निरस्त।
कटनी। महिला एवं बाल विकास विभाग, कटनी में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत के विरुद्ध फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर विभागीय लाभ लेने और कार्यालय को गुमराह करने के मामले में विभागीय जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की गई है। जांच में प्रमाण-पत्र के फर्जी पाए जाने तथा उसके आधार पर अनुचित लाभ लेने का आरोप प्रमाणित होने के बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने श्री राजपूत को सहायक ग्रेड-3 के पद से चतुर्थ श्रेणी भृत्य के पद पर प्रत्यावर्तित यानी पदावनत कर दिया है। उनकी नई पदस्थापना कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना ढीमरखेड़ा में की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आशाराम राजपूत वर्ष 2006 में भृत्य के पद पर कार्यरत थे। इसी वर्ष उन्हें सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति मिली थी। इसके बाद वे सहायक ग्रेड-3 के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। वर्ष 2019 में प्रथम समयमान वेतनमान दिए जाने की प्रक्रिया के दौरान उनकी सेवा पुस्तिका में हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने संबंधी प्रमाण-पत्र दर्ज नहीं पाया गया। इस पर जिला पेंशन कार्यालय द्वारा आपत्ति दर्ज की गई थी।
विभागीय स्तर पर प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बाद श्री राजपूत ने नवंबर 2020 में हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण-पत्र विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया। प्रमाण-पत्र की सत्यता की जांच शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन परीक्षा परिषद, भोपाल से कराई गई। जांच के दौरान प्रस्तुत प्रमाण-पत्र का उपलब्ध परीक्षाफल एवं परिषद के अभिलेखों से मिलान नहीं पाया गया। इसके बाद मामले में विभागीय जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
विभागीय जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने, उसके माध्यम से अनुचित लाभ लेने तथा कार्यालय को गुमराह करने संबंधी आरोप प्रमाणित पाए गए। जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की।
विभागीय जांच के निष्कर्षों और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-10 में किए गए प्रावधानों के तहत कलेक्टर आशीष तिवारी ने आशाराम राजपूत को सहायक ग्रेड-3 के पद से चतुर्थ श्रेणी भृत्य के पद पर प्रत्यावर्तित करने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2019 में प्रदान किए गए प्रथम समयमान वेतनमान का आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद श्री राजपूत अब सहायक ग्रेड-3 के पद पर नहीं रहेंगे और उन्हें भृत्य के पद पर कार्य करना होगा। उनकी पदस्थापना बाल विकास परियोजना ढीमरखेड़ा कार्यालय में की गई है। विभागीय जांच में फर्जी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने का आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद हुई इस कार्रवाई को विभागीय सेवा नियमों के तहत महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है।
मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि शासकीय सेवा में पदोन्नति, वेतनमान अथवा अन्य सेवा लाभ प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण-पत्रों की सत्यता का सत्यापन किया जाना आवश्यक है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर शासकीय लाभ लेने का प्रयास सामने आने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।


