गौठान एवं शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप,कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन पर उठे सवाल।
बरही के वार्ड क्रमांक 15 हीरापुर में 5 से 7 एकड़ गौठान भूमि पर कब्जे का आरोप,वार्डवासियों ने पैमाइश कर अतिक्रमण हटाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
बरही,ग्रामीण खबर MP।
नगर परिषद बरही के वार्ड क्रमांक 15 स्थित हीरापुर क्षेत्र में गौठान एवं शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि मवेशियों के चरने, बैठने तथा पानी पीने के लिए सुरक्षित रखी गई शासकीय भूमि पर कब्जा किए जाने से क्षेत्र में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 15 में लगभग 5 से 7 एकड़ शासकीय भूमि गौठान एवं पशुओं के उपयोग के लिए सुरक्षित थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड निवासी सुनील चौधरी, पिता सुंदर चौधरी द्वारा उक्त भूमि को ट्रैक्टर से जुतवाकर चारों ओर बाड़ लगा दी गई है, जिससे उस पर कब्जा कर खेती की तैयारी की जा रही है।
वार्डवासियों का यह भी कहना है कि इससे पहले सुंदर चौधरी द्वारा भी लगभग 5 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे ईंट-भट्टा संचालकों को किराये पर दिए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। लोगों का दावा है कि शासन द्वारा लगभग 3 एकड़ भूमि पहले से ही संबंधित परिवार को आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद अतिरिक्त शासकीय भूमि पर कब्जा किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि स्थानीय लोगों के दावे सही पाए जाते हैं तो कुल मिलाकर लगभग 10 से 12 एकड़ शासकीय भूमि प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गौठान की भूमि पर अतिक्रमण होने से क्षेत्र के मवेशियों के चरने एवं पानी पीने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा है। इससे पशुपालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि गौठान जैसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
वार्डवासियों के अनुसार, इस मामले की शिकायत नगर परिषद बरही तथा तहसील कार्यालय में कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो भूमि की पैमाइश कराई गई और न ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने तहसीलदार तथा नगर परिषद प्रशासन से मांग की है कि राजस्व अमले के साथ मौके का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, शासकीय भूमि की विधिवत पैमाइश कराई जाए तथा यदि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाकर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि गौठान एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग की शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना जनहित एवं पशुधन संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। यदि संबंधित व्यक्ति अथवा प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

