बीजेपी विधायक ने ही दिए जमीन आवंटन के दस्तावेज,दिग्विजय सिंह के दावे से सियासत में मचा घमासान।

 बीजेपी विधायक ने ही दिए जमीन आवंटन के दस्तावेज,दिग्विजय सिंह के दावे से सियासत में मचा घमासान।

वीर भारत न्यास ट्रस्ट को एक रुपए की लीज पर भूमि आवंटन का मामला गरमाया,कांग्रेस और भाजपा दोनों के भीतर बढ़ी हलचल,जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बयानों से राजनीतिक बहस तेज।

भोपाल,ग्रामीण खबर MP।

मध्यप्रदेश की राजनीति में वीर भारत न्यास ट्रस्ट को भूमि आवंटन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज उन्हें भारतीय जनता पार्टी के ही एक विधायक ने उपलब्ध कराए थे। हालांकि उन्होंने संबंधित विधायक का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग मतों को उजागर कर दिया है।

बड़वानी प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों पर अपनी अलग राय रखते हुए कहा कि जिस वीर भारत न्यास ट्रस्ट को भूमि आवंटित की गई है, वह एक सरकारी ट्रस्ट है। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं, जबकि उपाध्यक्ष प्रदेश के संस्कृति मंत्री और सचिव के रूप में सरकारी अधिकारी कार्य करते हैं। दिग्विजय सिंह का कहना था कि उन्होंने स्वयं दस्तावेजों का परीक्षण कराया और उसी आधार पर अपनी बात रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि जीतू पटवारी को इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके कारण उन्होंने अलग प्रकार का बयान दिया।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि वीर भारत न्यास ट्रस्ट को मात्र एक रुपये की लीज पर उपलब्ध कराई गई है। पटवारी ने इस निर्णय को सार्वजनिक हित के विपरीत बताते हुए सरकार से जवाब मांगा था और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने इस विवाद को नया राजनीतिक आयाम दे दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकार से असंतुष्ट भाजपा के ही एक विधायक ने उन्हें ट्रस्ट से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। हालांकि उन्होंने विधायक की पहचान उजागर करने से इनकार किया, लेकिन राजनीतिक हलकों में आलोट विधायक चिंतामणी मालवीय के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। उल्लेखनीय है कि विधायक चिंतामणी मालवीय और राज्य सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि इस मामले में विधायक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद भाजपा संगठन के भीतर भी हलचल बढ़ने की चर्चा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी संगठन स्तर पर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है और इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि आखिर दस्तावेजों के संबंध में इस प्रकार के दावे क्यों सामने आए। हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई अधिकृत बयान जारी नहीं किया गया है।

दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग स्वर सुनाई देने लगे हैं। दिग्विजय सिंह द्वारा जीतू पटवारी के आरोपों को तथ्यात्मक रूप से अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किए जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे पार्टी के भीतर मतभेद के संकेत के रूप में देखा। हालांकि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बीच प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के रुख का समर्थन किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जीतू पटवारी की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में भूमि आवंटन से जुड़े कथित घोटालों के मामले में कांग्रेस जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करती रहेगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने भूमि आवंटन के मुद्दे को केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि यह अब प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के भीतर इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने से राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

फिलहाल इस विवाद में विभिन्न नेताओं की ओर से अलग-अलग दावे और प्रतिदावे किए जा रहे हैं। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है, जबकि सरकार की ओर से भी भविष्य में विस्तृत स्पष्टीकरण आने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर क्या कोई आधिकारिक जांच होती है अथवा सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से कौन-कौन से तथ्य सार्वजनिक किए जाते हैं। तब तक यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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