दर्शनी पंचायत के सरपंच सुमित राय पद से पृथक,अनियमित भुगतान मामले में हुई कार्रवाई।

 दर्शनी पंचायत के सरपंच सुमित राय पद से पृथक,अनियमित भुगतान मामले में हुई कार्रवाई।

पिता को आर्थिक लाभ पहुंचाने और पद के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध,जिला पंचायत सीईओ ने जारी किया आदेश।

जबलपुर,ग्रामीण खबर MP।

जबलपुर जिले की ग्राम पंचायत दर्शनी में सरपंच सुमित राय को पद के दुरुपयोग और अपने निकट संबंधी को आर्थिक लाभ पहुंचाने के मामले में पद से पृथक कर दिया गया है। न्यायालय विहित प्राधिकारी एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की संबंधित धाराओं के तहत यह कार्रवाई की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत दर्शनी के सरपंच सुमित राय पर आरोप था कि उन्होंने पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से अपने पिता संतोष राय को 50 हजार रुपये का भुगतान कराया। यह भुगतान विधायक निधि तथा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों के नाम पर किया गया था। मामले की शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच जनपद पंचायत स्तर पर कराई गई, जिसमें वित्तीय अनियमितता और हितों के टकराव से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होने की बात सामने आई।

जांच प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया कि पंचायत प्रतिनिधि होने के बावजूद सरपंच द्वारा अपने निकट संबंधी को आर्थिक लाभ पहुंचाने का कार्य किया गया, जो पंचायत प्रशासन की निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना गया। जांच अधिकारियों ने इसे पद के दुरुपयोग की श्रेणी में रखते हुए संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध अभिलेखों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया गया। इसके उपरांत न्यायालय विहित प्राधिकारी एवं जिला पंचायत सीईओ ने यह निष्कर्ष निकाला कि सरपंच के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया नहीं बल्कि प्रमाणित रूप से सिद्ध हुए हैं। इसी आधार पर मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40(क) एवं 40(ख) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से सरपंच पद से पृथक करने का आदेश जारी किया गया।

इस कार्रवाई के बाद ग्राम पंचायत दर्शनी में सरपंच का पद रिक्त माना जाएगा। प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार पंचायत के संचालन हेतु नियमानुसार स्थानापन्न सरपंच की नियुक्ति अथवा निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे पंचायत के विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन प्रभावित न हो।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की कार्रवाइयाँ आवश्यक हैं। वहीं प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि पंचायत निधियों के उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात या पद के दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना को पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप ही होना चाहिए तथा जनप्रतिनिधियों से उच्च नैतिक मानकों के पालन की अपेक्षा की जाती है।



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