सगमा में एक माह की श्रीराम कथा का शुभारंभ,भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हुआ वातावरण।

 सगमा में एक माह की श्रीराम कथा का शुभारंभ,भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हुआ वातावरण।

कथावाचक चंद्रूलाल बागरी ने श्रीराम के आदर्श जीवन का किया वर्णन,माता-पिता के सम्मान और धर्म पालन का दिया संदेश।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।

सिलौंडी क्षेत्र के समीप स्थित ग्राम सगमा में धार्मिक आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक माह तक आयोजित होने वाली श्रीराम कथा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कथा के प्रथम दिवस से ही गांव में धार्मिक वातावरण निर्मित हो गया तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर भगवान श्रीराम के चरित्र एवं जीवन दर्शन का श्रवण करने लगे।

इस धार्मिक आयोजन में प्रसिद्ध कथावाचक चंद्रूलाल बागरी द्वारा प्रतिदिन श्रीराम कथा का वाचन किया जाएगा। कथा के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीराम भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या, मर्यादा, सत्य, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में आदर्शों का पालन करते हुए समाज को एक ऐसी दिशा प्रदान की, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारों वर्ष पूर्व थी।

कथावाचक ने कहा कि श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जीवन के लिए भी अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने माता-पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए राजपाट और सुख-सुविधाओं का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया तथा कभी भी धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं हुए। यही कारण है कि भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।

कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को भगवान श्रीराम के आदर्शों की सर्वाधिक आवश्यकता है। परिवारों में बढ़ती दूरियों, सामाजिक चुनौतियों और नैतिक मूल्यों के ह्रास के बीच श्रीराम का जीवन मानवता को सही दिशा प्रदान करता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने माता-पिता का सम्मान करे, सत्य और धर्म के मार्ग पर चले तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझे, तो एक आदर्श समाज की स्थापना संभव है।

कथा के प्रथम दिवस पर श्रीराम कथा के श्रवण के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। कथावाचक ने बताया कि भगवान की कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का माध्यम भी है। कथा श्रवण से मन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है, व्यक्ति के भीतर नैतिक मूल्यों का विकास होता है तथा जीवन को नई दिशा और ऊर्जा प्राप्त होती है। श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा, त्याग, करुणा और सदाचार जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

ग्राम सगमा में आयोजित इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है। कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे कथा स्थल पर पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा भी व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। एक माह तक चलने वाली इस कथा में भगवान श्रीराम के जन्म, बाल लीला, वनवास, सीता हरण, सुग्रीव मैत्री, लंका विजय और रामराज्य स्थापना जैसे विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

कथा के शुभारंभ अवसर पर ग्राम के वरिष्ठ नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मप्रेमी नागरिक, महिलाएं एवं युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीराम के जयघोष लगाए गए, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में नैतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिया।

ग्राम सगमा में प्रारंभ हुई यह एक माह की श्रीराम कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक संस्कारों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि इस पावन आयोजन से क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होगा तथा समाज में सद्भाव, नैतिकता और धार्मिक संस्कारों को नई मजबूती मिलेगी।



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