बिस्तरा की बोरा कंपनी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा,प्रदूषण और विस्फोटों से जीवन प्रभावित,जवाब मांगने पर प्रबंधन मौन।

 बिस्तरा की बोरा कंपनी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा,प्रदूषण और विस्फोटों से जीवन प्रभावित,जवाब मांगने पर प्रबंधन मौन।

कैमोर पहाड़ियों के संरक्षण,प्रदूषण नियंत्रण और CSR कार्यों की जांच की उठी मांग,सांसद वी.डी.शर्मा से ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले के बिस्तरा गांव में संचालित मे. एन. एम. दुबास कंपनी, जिसे स्थानीय लोग "बोरा कंपनी" के नाम से जानते हैं, एक बार फिर ग्रामीणों के निशाने पर आ गई है। तीन पीढ़ियों से क्षेत्र में संचालित इस औद्योगिक इकाई के खिलाफ अब गांव के लोगों का असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी की गतिविधियों से क्षेत्र में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, वहीं खदानों में होने वाले विस्फोटों से जनजीवन और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय मौन साधे हुए है।

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी परिसर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक कैमोर पहाड़ियां लगातार प्रभावित हो रही हैं। खुले खनन कार्य, क्रेशर मशीनों से उड़ने वाली धूल तथा नियमित रूप से किए जाने वाले विस्फोटों के कारण पहाड़ियों की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विस्फोटों के दौरान उत्पन्न कंपन से आसपास के मकानों में दरारें पड़ने लगी हैं तथा लोगों के मन में भय का वातावरण बना रहता है।

गांव के निवासियों का आरोप है कि धूल और धुएं के कारण वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। कई लोगों को सांस संबंधी परेशानियों, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में पहले बड़ी संख्या में दिखाई देने वाले वन्य जीव और पक्षी अब धीरे-धीरे पलायन कर रहे हैं। उनका मानना है कि अत्यधिक शोर और लगातार होने वाले विस्फोट इसके प्रमुख कारण हैं।

ग्रामीणों ने कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी यानी CSR गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्षों से कंपनी यहां संचालित होने के बावजूद गांव में विकास कार्यों के नाम पर कोई बड़ा या स्थायी योगदान दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क अथवा अन्य बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में कंपनी द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि कंपनी द्वारा CSR मद में खर्च की जाने वाली राशि आखिर कहां उपयोग हो रही है।

इस पूरे मामले में कंपनी का पक्ष जानने के लिए हमारी टीम द्वारा कंपनी के मैनेजर एवं एचआर अधिकारी के के चंद्रा से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया। बताया गया कि उन्हें बार-बार फोन लगाए गए, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की और न ही किसी प्रकार की प्रतिक्रिया दी। इससे ग्रामीणों में यह धारणा और मजबूत हो रही है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में भी विभिन्न माध्यमों से इस मुद्दे को प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों तथा पर्यावरणीय मानकों के पालन की निगरानी करने वाली एजेंसियों द्वारा भी अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई है।

इसी बीच क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा के प्रस्तावित दौरे पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सांसद क्षेत्रीय समस्याओं का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देंगे तथा कैमूर पहाड़ियों और आसपास के गांवों को पर्यावरणीय क्षति से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों ने मांग की है कि कंपनी के खनन कार्यों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और CSR गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित नियमों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके और प्राकृतिक धरोहर कैमूर पहाड़ियों का संरक्षण किया जा सके।

कंपनी का पक्ष समाचार प्रकाशन तक प्राप्त नहीं हो सका। प्रबंधन की ओर से प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

यह रिपोर्ट क्षेत्रीय निरीक्षण, स्थानीय ग्रामीणों के बयानों तथा कंपनी प्रबंधन से संपर्क के प्रयासों के आधार पर तैयार की गई है। कंपनी के लाइसेंस, पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं अन्य वैधानिक अनुमतियों की अंतिम स्थिति संबंधित विभागों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

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