सचिव पर फर्जी हस्ताक्षर कर राशि निकालने का आरोप,सरपंच ने की शिकायत।

 सचिव पर फर्जी हस्ताक्षर कर राशि निकालने का आरोप,सरपंच ने की शिकायत।

ग्राम पंचायत घुघरा में 46,400 रुपये के कथित अनियमित आहरण का मामला,सीईओ ने जांच के आदेश दिए,दो दिन में मांगा प्रतिवेदन

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले की जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत घुघरा में वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत की सरपंच कौशिल्या प्रहलाद सोनी ने पंचायत सचिव रामदयाल पटेल पर उनकी सील एवं फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग कर पंचायत खाते से 46,400 रुपये की राशि आहरित करने का आरोप लगाया है। मामले की लिखित शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा को सौंप दी गई है, जिसके बाद प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सरपंच द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि पंचायत सचिव ने बिना उनकी जानकारी और अनुमति के पंचायत खाते से विभिन्न मदों के नाम पर राशि निकाली। शिकायत के अनुसार सरपंच की आधिकारिक सील और हस्ताक्षरों का दुरुपयोग करते हुए भुगतान संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए और राशि का आहरण कर लिया गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत की वित्तीय गतिविधियों से संबंधित ईपीओ (EPO) की लगातार मांग किए जाने के बावजूद सचिव द्वारा उसे उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे पंचायत के वित्तीय अभिलेखों और भुगतान प्रक्रियाओं को लेकर संदेह और गहरा गया है।

शिकायत के अनुसार पंचायत खाते से निम्नानुसार राशि आहरित की गई है—

25 मई 2026 को स्टेशनरी भुगतान के नाम पर 5,600 रुपये,

26 मई 2026 को नाली सफाई कार्य के नाम पर 21,600 रुपये,

26 मई 2026 को ही नाली साफ-सफाई संबंधी अन्य कार्यों के नाम पर 19,200 रुपये।

इस प्रकार कुल 46,400 रुपये की राशि पंचायत खाते से निकाले जाने का आरोप लगाया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी यजुर्वेन्द्र कोरी ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने पत्र जारी कर आर.पी.एस. मार्को, बी.पी.एस. तथा एडीओ अजिताभ सिंह को मामले की जांच कर दो दिवस के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच दल पंचायत के वित्तीय अभिलेखों, बैंक दस्तावेजों, भुगतान आदेशों तथा हस्ताक्षरों की सत्यता का परीक्षण करेगा। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है और सचिव की भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

ग्राम पंचायत स्तर पर सामने आया यह मामला स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत निधियों का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि पंचायत व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे।

अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत खाते से राशि का आहरण नियमानुसार हुआ या फिर शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं। जांच प्रतिवेदन आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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