घर में घुसकर लाठी-डंडों व लोहे की रॉड से हमला करने का आरोप,पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार।
मारपीट में गंभीर चोट लगने का दावा,निवार चौकी पुलिस पर सभी आरोपियों के नाम दर्ज न करने का आरोप,निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
जिले के ग्राम लखापतेरी में कथित मारपीट, घर में घुसकर हमला करने तथा जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। घटना में घायल हुए युवक ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक कटनी को विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सभी आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ हुई गंभीर मारपीट की घटना में कई लोग शामिल थे, लेकिन पुलिस द्वारा केवल एक व्यक्ति का नाम दर्ज कर प्रकरण कायम किया गया, जिससे उसे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर होती दिखाई दे रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम लखापतेरी निवासी किशन लाल कुशवाहा पिता सुच्चू लाल कुशवाहा ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में बताया है कि 3 जून 2026 की शाम लगभग 6:30 बजे उसके घर के सामने गांव का एक युवक मोबाइल फोन पर किसी से बातचीत करते हुए कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहा था। उस समय घर के बाहर उसकी बहन और बेटियां भी मौजूद थीं। सामाजिक मर्यादा और परिवार की महिलाओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए उसने युवक को समझाइश देते हुए सार्वजनिक स्थान पर ऐसी भाषा का प्रयोग न करने की बात कही।
पीड़ित के अनुसार उसके द्वारा इतना कहे जाने पर संबंधित युवक आक्रोशित हो गया और उसे गाली-गलौज करने लगा। स्थिति को बिगड़ता देख वह अपने घर के भीतर चला गया और दरवाजा बंद कर लिया। आरोप है कि कुछ ही देर बाद युवक के परिजन और अन्य लोग भी वहां पहुंच गए और आक्रामक रवैया अपनाते हुए घर का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश कर गए।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि आरोपियों ने उसे घर के भीतर से पकड़कर बाहर खींच लिया और लाठी-डंडों तथा लोहे की रॉड से हमला कर दिया। पीड़ित का कहना है कि हमले के दौरान उसके सिर पर गंभीर चोट पहुंची, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और बाद में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ा। उपचार के दौरान उसके सिर में कई टांके लगाए गए। इसके अलावा पीठ, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आने का दावा किया गया है। घायल युवक का कहना है कि मारपीट इतनी गंभीर थी कि कुछ समय तक वह सामान्य रूप से चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं था।
घटना के बाद पीड़ित शिकायत दर्ज कराने निवार पुलिस चौकी पहुंचा। उसका आरोप है कि उसने पुलिस को घटना से जुड़े सभी व्यक्तियों के नाम बताए और विस्तार से पूरी घटना की जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत के अनुसार रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पीड़ित का कहना है कि मारपीट में कई लोगों की भूमिका होने के बावजूद केवल एक आरोपी का नाम दर्ज कर मामला कायम किया गया, जबकि अन्य आरोपियों के नाम रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद आरोपी पक्ष द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित के अनुसार जब वह अस्पताल में उपचाररत था, तब उसके परिजनों ने उसे फोन पर बताया कि आरोपी पक्ष के लोग घर के आसपास पहुंचकर गाली-गलौज कर रहे हैं और शिकायत वापस लेने तथा समझौता करने के लिए धमका रहे हैं। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट वापस न लेने की स्थिति में उसे जान से खत्म कर देने की धमकी भी दी गई। इतना ही नहीं, उसकी पत्नी और बच्चों के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने तथा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि स्थानीय स्तर पर उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण उसे न्याय की उम्मीद में सीधे जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष पहुंचना पड़ा। उसका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो उसके परिवार की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। उसने पुलिस प्रशासन से स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आवेदन में पीड़ित ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराई जाए, घटना में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए तथा उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सभी आरोपियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही उसने यह भी मांग की है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
ग्रामीण क्षेत्र में हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ सामूहिक रूप से मारपीट हुई है और उसके पास इसके समर्थन में साक्ष्य एवं चिकित्सकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन के लिए भी यह मामला चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शिकायतकर्ता ने सीधे जिला पुलिस प्रमुख के समक्ष स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है। अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन मामले की जांच किस प्रकार करता है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर क्या कदम उठाए जाते हैं। यदि जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके आधार पर भी आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति पुलिस जांच पूर्ण होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पीड़ित द्वारा न्याय की मांग को लेकर सौंपा गया ज्ञापन प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आगामी कार्रवाई पर केंद्रित हैं।

