ग्रामपंचायत घुघरी में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप,ग्रामीणों ने सरपंच-सचिव के खिलाफ जांच की उठाई मांग।
मुख्यकार्यपालन अधिकारी को सौंपा विस्तृत ज्ञापन,फर्जी बिलों और नल-जल योजना की राशि में अनियमितता के लगाए आरोप।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्रामपंचायत घुघरी में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। ग्राम के अनेक ग्रामीणों ने सरपंच लक्ष्मी बाई मांझी एवं सचिव रामदयाल पटेल के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यकार्यपालन अधिकारी यजुर्वेन्द्र कोरी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्रामपंचायत में साफ-सफाई एवं कार्यालय व्यय के नाम पर लगातार फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये की राशि आहरित की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों द्वारा अपने परिजनों और परिचितों के नाम पर बिल प्रस्तुत कर शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सचिव रामदयाल पटेल के प्रभार ग्रहण करने के बाद से साफ-सफाई एवं कार्यालय व्यय के मद में बड़ी संख्या में संदिग्ध एवं कथित फर्जी बिल लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव द्वारा अपने पुत्र के नाम पर तथा सरपंच द्वारा स्वयं, अपने पुत्र एवं पति के नाम पर बिल प्रस्तुत कर लाखों रुपये की राशि का भुगतान कराया गया है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दीपक चौरसिया नामक व्यक्ति को डेटा सहायक सचिव के रूप में दर्शाकर उसके नाम से भी भुगतान किए जाने संबंधी बिल लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने इन भुगतानों की भी विस्तृत जांच की मांग की है।
ग्रामीणों ने नल-जल योजना की राशि को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार योजना से प्राप्त होने वाली वसूली राशि पंचायत खाते में नियमित रूप से जमा नहीं की जाती, बल्कि उसका उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है। आरोप है कि योजना से संबंधित राशि का उचित लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है तथा उसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सरपंच द्वारा अपने रिश्तेदार को नल-जल योजना से संबंधित कार्य सौंपा गया है, जो ग्रामीणों से राशि वसूल कर पंचायत पदाधिकारियों को उपलब्ध कराता है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद ग्राम में विकास एवं निर्माण कार्य अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देते।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सचिव रामदयाल पटेल के कार्यकाल के दौरान छोटे-बड़े अनेक बिलों के माध्यम से लगभग 10 लाख रुपये तक की राशि के कथित फर्जी भुगतान किए गए हैं। ग्रामीणों ने इन सभी भुगतानों की वित्तीय एवं तकनीकी जांच कराए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने मुख्यकार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक सक्षम टीम गठित की जाए, आरोपों की सत्यता की जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही शासन की कथित रूप से आहरित एवं दुरुपयोग की गई राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई और जांच प्रक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

