सब जेल सिहोरा में बह रही ज्ञान की गंगा,निरक्षर बंदियों को साक्षर बनाकर किया जा रहा पुनर्वास।

 सब जेल सिहोरा में बह रही ज्ञान की गंगा,निरक्षर बंदियों को साक्षर बनाकर किया जा रहा पुनर्वास।

जेलर दिलीप नायक की पहल से चल रहा अनुग्रह साक्षरता कार्यक्रम,अब तक 20 बंदी हुए साक्षर,शिक्षा के माध्यम से बदल रही जिंदगी की दिशा।

सिहोरा,ग्रामीण खबर एमपी।

जेल को केवल दंड का स्थान नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाने की दिशा में सब जेल सिहोरा एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। यहां निरुद्ध निरक्षर बंदियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष साक्षरता अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस अभिनव पहल के तहत जेल में प्रवेश करने वाले निरक्षर बंदियों को पढ़ना-लिखना सिखाकर साक्षर बनाया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।

सब जेल सिहोरा के जेलर दिलीप नायक के विशेष प्रयासों और मार्गदर्शन में स्वयंसेवी संस्था गुड न्यूज सर्विस सोसाइटी, भोपाल द्वारा "अनुग्रह साक्षरता कार्यक्रम" संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को की गई थी। कार्यक्रम के अंतर्गत संस्था की शिक्षिका एनी जार्ज द्वारा नियमित रूप से जेल परिसर में कक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें निरक्षर बंदियों को अक्षर ज्ञान से लेकर पढ़ने-लिखने की मूलभूत शिक्षा प्रदान की जाती है।

जेल प्रशासन के अनुसार 17 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 20 निरक्षर बंदियों को सफलतापूर्वक साक्षर बनाया गया। यह अभियान वर्तमान में भी निरंतर जारी है। जेल में आने वाले नए निरक्षर बंदियों को चिन्हित कर उन्हें साक्षरता कार्यक्रम से जोड़ा जाता है, ताकि रिहाई के समय वे पढ़ने-लिखने में सक्षम होकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

जेलर दिलीप नायक ने बताया कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी सोच के साथ यह पहल शुरू की गई, जिसका उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान देना नहीं बल्कि बंदियों में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और नई सोच का विकास करना भी है। उन्होंने बताया कि साक्षरता प्राप्त करने के बाद बंदियों में सीखने की रुचि बढ़ी है तथा उनके व्यवहार और मानसिकता में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।

साक्षरता अभियान के कारण जेल का वातावरण भी पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक और प्रेरणादायक बना है। बंदी उत्साहपूर्वक कक्षाओं में भाग ले रहे हैं तथा शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। यह कार्यक्रम बंदियों को समाज में पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

सामाजिक संगठनों और जेल प्रशासन के संयुक्त प्रयास से संचालित यह पहल न केवल बंदियों को नई पहचान दे रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि शिक्षा के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। सब जेल सिहोरा का यह प्रयास सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की भावना को साकार करते हुए अन्य जेलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।

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