बकेली शिव मंदिर में वर्षों से चल रही आस्था और आयुर्वेदिक उपचार की परंपरा,वायरल वीडियो के बाद चर्चा तेज।
स्वास्थ्य विभाग ने किया निरीक्षण,ग्रामीणों और सरपंच ने कहा-"भोलेनाथ की कृपा और विश्वास से मिलती है राहत,किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
विजयराघवगढ़,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले की तहसील विजयराघवगढ़ अंतर्गत ग्राम सिकनपुरा बकेली स्थित प्राचीन शिव मंदिर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मंदिर परिसर में आयुर्वेदिक पद्धति और पारंपरिक तरीके से उपचार किए जाने संबंधी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया। वीडियो में मंदिर परिसर में मरीजों को उपचार दिए जाने तथा ग्राम क्षेत्र में उपचार संबंधी गतिविधियों का उल्लेख किया गया था, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए स्थल निरीक्षण किया।
इसी क्रम में "पत्रकारों" की टीम ने बकेली पहुंचकर स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा मंदिर से जुड़े लोगों से चर्चा की। मौके पर प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने मंदिर में वर्षों से चली आ रही उपचार परंपरा को आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय बताया तथा कहा कि यहां आने वाले लोग स्वेच्छा से पहुंचते हैं और राहत मिलने का अनुभव साझा करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बकेली स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में वर्षों से श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते रहे हैं और कई लोग अपनी शारीरिक समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर यहां आते हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा तथा पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति के माध्यम से लोगों को लाभ प्राप्त होता है।
मंदिर परिसर में मौजूद ग्राम पंचायत बकेली के प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा वीडियो नया नहीं बल्कि काफी पुराना है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में वीडियो के पुनः वायरल होने के बाद विभिन्न प्रकार की चर्चाएं प्रारंभ हुईं, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी मंदिर पहुंचकर निरीक्षण किया और वहां की परिस्थितियों का अवलोकन किया।
ग्राम पंचायत बकेली की सरपंच सरिता सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बातचीत के दौरान कहा कि मंदिर में होने वाली गतिविधियां पूरी तरह लोगों की श्रद्धा और विश्वास पर आधारित हैं। किसी व्यक्ति को यहां आने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। जो लोग अपनी इच्छा से पहुंचते हैं, वे अपनी आस्था के अनुरूप पूजा-अर्चना एवं उपचार संबंधी प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना या जनहानि की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उपचार के दौरान किसी मरीज की मृत्यु अथवा गंभीर नुकसान की घटना सामने आई है, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से ऐसे आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है।
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता भी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित खबरों के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा बकेली शिव मंदिर पहुंचकर निरीक्षण किया गया। हालांकि निरीक्षण के दौरान क्या तथ्य सामने आए और विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी है।
मामले के संबंध में जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह से आधिकारिक पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क स्थापित नहीं हो सका। विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अथवा जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति देश में एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणाली है, जिसका संचालन निर्धारित नियमों एवं वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है। उपचार से संबंधित गतिविधियों, चिकित्सकीय योग्यता, औषधियों के उपयोग तथा पंजीकरण संबंधी विषयों की निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जाती है। ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति विभागीय जांच एवं आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होती है।
बकेली शिव मंदिर का यह मामला एक ओर जहां ग्रामीणों की गहरी धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा को सामने लाता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य एवं वैधानिक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर उठ रहे प्रश्नों को भी रेखांकित करता है। अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निष्कर्षों पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
समाचार के संबंध में यह उल्लेखनीय है कि ग्रामीणों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उनकी व्यक्तिगत आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं। उपचार की प्रभावशीलता, वैज्ञानिक आधार तथा वैधानिक स्थिति की पुष्टि संबंधित विभागों और विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा ही की जा सकती है। समाचार का उद्देश्य उपलब्ध तथ्यों, ग्रामीणों के पक्ष तथा विभागीय कार्रवाई की जानकारी पाठकों तक संतुलित रूप से पहुंचाना है।

