सीनियर कन्या छात्रावास भवन निर्माण में देरी से आदिवासी छात्राओं की शिक्षा पर संकट,वर्षों से अधूरी पड़ी योजना।
सिलौंडी में 2 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत छात्रावास भवन का निर्माण शुरू नहीं,उच्च शिक्षा के लिए छात्राओं को करना पड़ रहा संघर्ष।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।
शासन द्वारा आदिवासी समुदाय के शैक्षणिक उत्थान और बेटियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार का दावा है कि दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की छात्राओं को बेहतर शिक्षा, आवास और सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। लेकिन सिलौंडी क्षेत्र में इन दावों की वास्तविक स्थिति कुछ अलग ही नजर आ रही है।
सिलौंडी में प्रस्तावित सीनियर कन्या छात्रावास भवन का निर्माण वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका है, जिसके कारण क्षेत्र की अनेक आदिवासी छात्राओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में लगभग 2 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से सीनियर कन्या छात्रावास भवन स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि परियोजना की टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है, जिसके चलते भवन निर्माण का कार्य कागजों तक सीमित होकर रह गया है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में आदिवासी छात्राएं अच्छे अंकों के साथ माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षाएं उत्तीर्ण करती हैं। इनमें से कई छात्राएं आगे की पढ़ाई करने की इच्छुक होती हैं, लेकिन छात्रावास में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें रहने और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। परिणामस्वरूप अनेक छात्राओं को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार वर्तमान छात्रावास में सीमित क्षमता होने के कारण नई छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पाता। कई बार छात्राओं और उनके अभिभावकों को यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि छात्रावास में जगह उपलब्ध नहीं है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सामने उच्च शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग कठिन हो जाता है।
जागरूक नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते छात्रावास भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भी अनेक छात्राएं शिक्षा से वंचित होती रहेंगी।
सिलौंडी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने शासन एवं प्रशासन से मांग की है कि सीनियर कन्या छात्रावास भवन की लंबित प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कराया जाए। उनका कहना है कि आदिवासी बेटियों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए यह छात्रावास अत्यंत आवश्यक है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस महत्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक कदम उठाएगा, जिससे छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बेहतर अवसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। :::

