विश्व पर्यावरण दिवस पर शासकीय महाविद्यालय सिलौंडी में चला ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान,छात्र-छात्राओं ने किया पौधरोपण।
पीपल,नीम,आम,जामुन एवं बरगद सहित विभिन्न पौधे लगाए गए,पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर एमपी।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासकीय महाविद्यालय सिलौंडी में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य रतिराम अहिरवार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों एवं महाविद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान एनएसएस कार्यक्रम प्रभारी डॉ. लक्ष्मी प्रसाद बागरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व का आधार भी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की महत्ता बताते हुए कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृ सम्मान की भावना को भी मजबूत करती है।
इस अवसर पर पंकज मिश्रा ने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।
कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर में पीपल, आम, नीम, जामुन, बरगद, कनेर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। पौधरोपण के दौरान उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में प्राचार्य रतिराम अहिरवार, एनएसएस कार्यक्रम प्रभारी डॉ. लक्ष्मी प्रसाद बागरी, डॉ. हेमन्त कुमार चौरसिया, डॉ. अजय कछवाहा, रमन श्रीवास, रोहणी प्रसाद राय सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं एनएसएस स्वयंसेवकों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस वृक्षारोपण अभियान ने विद्यार्थियों के भीतर पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को और अधिक मजबूत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प लिया।

