सब जेल सिहोरा में शैक्षणिक पुनर्वास की अनूठी पहल,29 बंदी बने साक्षर।
जेलर दिलीप नायक के प्रयासों को मिला सम्मान,साक्षरता अभियान से बंदियों के जीवन में आ रहा सकारात्मक बदलाव।
सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।
सब जेल सिहोरा में बंदियों के शैक्षणिक पुनर्वास को लेकर एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। जेलर दिलीप नायक के विशेष प्रयासों से संचालित साक्षरता अभियान के अंतर्गत 29 विचाराधीन बंदियों को निरक्षरता से साक्षरता की ओर अग्रसर करने में सफलता प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि पर गुड न्यूज सर्विस सोसायटी, भोपाल द्वारा संचालित अनुग्रह साक्षरता कार्यक्रम के तहत एक भव्य संगीतमय समारोह आयोजित कर बंदियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान उन बंदियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने नियमित अध्ययन कर पढ़ना-लिखना सीखा और स्वयं को साक्षर बनाया। इस अवसर पर संस्था ने जेलर दिलीप नायक को भी उनके उत्कृष्ट योगदान, नेतृत्व एवं बंदियों के शैक्षणिक पुनर्वास के प्रति समर्पण के लिए प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
जानकारी के अनुसार फरवरी माह से प्रारंभ हुए अनुग्रह साक्षरता कार्यक्रम में दो दर्जन से अधिक विचाराधीन बंदियों ने भाग लिया। नियमित कक्षाओं और प्रशिक्षण के माध्यम से 29 बंदी अब पढ़ने-लिखने में सक्षम हो चुके हैं। यह पहल न केवल शिक्षा का प्रसार कर रही है बल्कि बंदियों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और समाज की मुख्यधारा में लौटने की भावना भी विकसित कर रही है।
कार्यक्रम में गुड न्यूज सर्विस सोसायटी के प्रतिनिधि गुडविन मसीह, एनी जार्ज, बीनू सहित संस्था के अन्य सदस्य एवं जेल स्टाफ उपस्थित रहे। सभी ने बंदियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए इस अभियान को समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जेलर दिलीप नायक ने बताया कि जेल परिसर में संचालित साक्षरता कार्यक्रम को बंदियों से उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है और यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि जो बंदी जेल में प्रवेश के समय केवल अंगूठा लगाते थे, वे रिहाई के समय अपना नाम लिखने और पढ़ने में सक्षम होकर बाहर निकलें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। जेल में चल रहा यह साक्षरता अभियान बंदियों के पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वास्तव में यह पहल केवल साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों को सम्मानजनक जीवन की नई राह दिखाने वाला एक सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास है।

