शासकीय पट्टे की भूमि पर कब्जा कर विक्रय का आरोप,एडवोकेट ने कलेक्टर,तहसीलदार व कब्जाधारी को भेजा कानूनी नोटिस।

 शासकीय पट्टे की भूमि पर कब्जा कर विक्रय का आरोप,एडवोकेट ने कलेक्टर,तहसीलदार व कब्जाधारी को भेजा कानूनी नोटिस।

ढीमरखेड़ा के खमतरा गांव का मामला,पट्टे की भूमि के अवैध विक्रय और अतिक्रमण की जांच की उठी मांग।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा से शासकीय पट्टे की भूमि के कथित अवैध विक्रय और अतिक्रमण का एक गंभीर मामला सामने आया है। मामले में जिला न्यायालय कटनी के अधिवक्ता अशोक त्रिपाठी द्वारा जिला कलेक्टर कटनी, तहसीलदार ढीमरखेड़ा तथा कब्जाधारी के नाम कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में शासकीय भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी तथा ग्रामीणों की निजी भूमि पर अतिक्रमण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अधिवक्ता अशोक त्रिपाठी ने अपने पक्षकार अशोक जायसवाल, प्रशांत कुमार डेनियल, घसीटा यादव, रमेश कुशवाहा सहित ग्राम खमतरा, तहसील ढीमरखेड़ा निवासी ग्रामीणों के निर्देश पर यह नोटिस प्रेषित किया है। नोटिस के अनुसार सभी पक्षकार गरीब एवं मजदूर वर्ग से जुड़े सीधे-साधे ग्रामीण हैं, जिनकी भूमि मौजा खमतरा, पटवारी हल्का नंबर 70 में स्थित है। संबंधित भूमि के खसरा नंबर 843/4, 824, 826 एवं 43/15 बताए गए हैं, जिन पर पक्षकारों का वैध कब्जा एवं स्वामित्व होना बताया गया है और राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज हैं।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उत्तरा उर्फ पूजा सोनी के नाम पर जो भूमि दर्ज है, वह शासकीय पट्टे की भूमि है, जो उनके पिता स्वर्गीय प्रेमलाल सोनी के निधन के बाद दर्ज हुई। जबकि स्वर्गीय प्रेमलाल सोनी के अन्य वारिस भी मौजूद हैं। आरोप है कि जानबूझकर अन्य वारिसों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराए गए, जिससे पूरी भूमि पर एकल अधिकार स्थापित किया जा सके।

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि पट्टे की होने के कारण उसका क्रय-विक्रय कानूनन संभव नहीं है। इसके बावजूद आरोप है कि उक्त भूमि को चोरी-छिपे बेचा जा रहा है या बेचा जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन पर निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है और निर्माण के दौरान उनकी निजी भूमि पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पक्षकारों ने यह भी संदेह जताया है कि शासन द्वारा स्वर्गीय प्रेमलाल सोनी को जितनी भूमि पट्टे पर दी गई थी, उससे अधिक भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा ली गई है। इसे गंभीर जांच का विषय बताते हुए नोटिस में मांग की गई है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मूल रूप से कितनी भूमि पट्टे पर मिली थी, कब मिली थी और किस योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी।

नोटिस में जिला कलेक्टर कटनी से मांग की गई है कि तहसीलदार ढीमरखेड़ा को तत्काल जांच के निर्देश दिए जाएं। साथ ही यदि अनियमितता पाई जाए तो पट्टा निरस्त कर ग्रामीणों की भूमि को सुरक्षित किया जाए। नोटिस में यह भी पूछा गया है कि यदि भूमि का विक्रय किया गया है तो किसे किया गया, निर्माण कार्य कौन करा रहा है तथा भूमि हस्तांतरण किस आधार पर हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो उन्हें अपनी पुश्तैनी भूमि से हाथ धोना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।

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