मोदी-मेलोनी की ‘Melodi’ दोस्ती पर सियासी घमासान,राहुल गांधी बोले-“देश संकट में,प्रधानमंत्री इमेज मैनेजमेंट में व्यस्त”।
इटली दौरे में मेलोनी को ‘Melody’ टॉफी गिफ्ट करने और वायरल वीडियो पर गरमाई राजनीति,कांग्रेस ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल तो भाजपा ने बताया भारत की मजबूत वैश्विक कूटनीति का प्रतीक।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की चर्चित “Melodi” दोस्ती एक बार फिर देश की राजनीति और सोशल मीडिया में बड़े विवाद का कारण बन गई है। इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मेलोनी को “Melody” टॉफी भेंट करने और दोनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश आर्थिक संकट, बेरोजगारी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री सोशल मीडिया इमेज और प्रचार आधारित राजनीति में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।
राहुल गांधी ने अमेठी और रायबरेली में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान कहा कि देश में किसानों की हालत लगातार खराब हो रही है, युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, छोटे व्यापारी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं और आम आदमी महंगाई से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने और समाधान खोजने के बजाय सरकार सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और प्रचार अभियानों को प्राथमिकता दे रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री का विदेश दौरे के दौरान “Melody” टॉफी गिफ्ट करना और उससे जुड़े वीडियो का वायरल होना यह दर्शाता है कि सरकार देश की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जब देश में आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही हों, तब सरकार को रोजगार, उद्योग, कृषि और महंगाई पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल कैमरे और इमेज मैनेजमेंट पर।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सरकार लगातार “इवेंट आधारित राजनीति” कर रही है। उनके अनुसार बड़े-बड़े कार्यक्रम, सोशल मीडिया अभियान और वायरल वीडियो जनता की वास्तविक परेशानियों को कम नहीं कर सकते। राहुल गांधी ने दावा किया कि देश का युवा भविष्य को लेकर चिंतित है और छोटे व्यवसाय लगातार आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से दूरी बनाती जा रही है।
राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राएं और सोशल मीडिया उपस्थिति लगातार चर्चा में रहती हैं, लेकिन बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर ठोस समाधान दिखाई नहीं देते। पार्टी नेताओं ने कहा कि जनता अब केवल प्रचार नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम चाहती है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे विषयों को सामने लाती है जो सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकें, ताकि वास्तविक आर्थिक और सामाजिक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। विपक्षी नेताओं का कहना है कि देश के युवाओं को रोजगार, किसानों को उचित समर्थन मूल्य और व्यापारियों को आर्थिक राहत की आवश्यकता है, लेकिन सरकार राजनीतिक प्रचार में अधिक व्यस्त है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक निराशा और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताया। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच की मित्रता भारत और इटली के मजबूत होते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है। भाजपा के अनुसार दोनों देशों के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी, व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक साझेदारी को लेकर लगातार महत्वपूर्ण सहयोग बढ़ रहा है।
भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विश्व स्तर पर भारत की पहचान मजबूत कर रहे हैं और दुनिया के कई बड़े नेता उनके साथ बेहतर संबंध स्थापित करना चाहते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा से विपक्ष असहज है और इसलिए ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है।
भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि किसी कूटनीतिक मुलाकात के दौरान हुए हल्के-फुल्के मानवीय पल को राजनीतिक विवाद का रूप देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार विश्व राजनीति में नेताओं के बीच सकारात्मक संबंध देशों के बीच मजबूत सहयोग को बढ़ावा देते हैं और इसे केवल सोशल मीडिया या प्रचार के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर “#Melodi” फिर से ट्रेंड करने लगा। प्रधानमंत्री मोदी समर्थकों ने इसे भारत और इटली की मजबूत दोस्ती, वैश्विक नेतृत्व और सकारात्मक कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक बताया। वहीं विपक्ष समर्थकों ने इसे सोशल मीडिया आधारित राजनीति और इमेज बिल्डिंग की रणनीति करार दिया।
एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी राय दी। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक लोकप्रियता की प्रशंसा की, जबकि कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या देश के आर्थिक और सामाजिक मुद्दों से अधिक ध्यान सोशल मीडिया छवि पर दिया जा रहा है।
दरअसल “Melodi” शब्द पहली बार वर्ष 2023 में उस समय चर्चा में आया था जब जी-20 सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक सेल्फी साझा की थी। उस तस्वीर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने मोदी और मेलोनी के नामों को जोड़कर “Melodi” कहना शुरू कर दिया था। देखते ही देखते यह शब्द इंटरनेट पर ट्रेंड बन गया और बाद में दोनों नेताओं की हर मुलाकात के दौरान इसका उपयोग होने लगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “Melodi” अब केवल सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं रह गया है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में एक प्रतीकात्मक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे सरकार की प्रचार शैली और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि भाजपा इसे प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक स्वीकार्यता और भारत की मजबूत विदेश नीति के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे लोकसभा चुनावों और विभिन्न राज्यों के चुनावों का माहौल बनेगा, वैसे-वैसे इस तरह के मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहेंगे। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं की व्यक्तिगत छवि, उनके सार्वजनिक व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी अब राजनीतिक नजरिए से देखा जाने लगा है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से लाभदायक साबित होती रही है, जबकि विपक्ष लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार को विदेश नीति और प्रचार के साथ-साथ घरेलू मुद्दों पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
फिलहाल “Melodi” को लेकर शुरू हुआ यह विवाद देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर भाजपा इसे मजबूत कूटनीति और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे सरकार की प्राथमिकताओं और प्रचार राजनीति का उदाहरण बताकर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

