ट्रेनों में गायब टीटी और सुरक्षा व्यवस्था, क्या भारतीय रेल बनती जा रही है जुआ और अव्यवस्था का अड्डा?

 ट्रेनों में गायब टीटी और सुरक्षा व्यवस्था, क्या भारतीय रेल बनती जा रही है जुआ और अव्यवस्था का अड्डा?

कोचों में खुलेआम जुआ,शराबखोरी और हंगामे से यात्री परेशान,महिलाओं और परिवारों में बढ़ रहा डर;रेलवे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा कहा जाता है। हर दिन करोड़ों यात्री ट्रेन के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। कोई नौकरी के लिए सफर करता है, कोई इलाज के लिए, कोई पढ़ाई के लिए तो कोई अपने परिवार से मिलने के लिए। रेलवे का सफर हमेशा से आम आदमी की सबसे सुलभ और भरोसेमंद यात्रा व्यवस्था माना जाता रहा है। लेकिन हाल के समय में कई ट्रेनों से जो तस्वीरें और शिकायतें सामने आ रही हैं, उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब ट्रेनों के कोचों में वह अनुशासन और सुरक्षा दिखाई नहीं देती, जिसकी यात्रियों को उम्मीद होती है। कई यात्रियों का आरोप है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में टीटीई यानी टिकट परीक्षक अक्सर नजर ही नहीं आते। कई बार पूरा सफर गुजर जाता है, लेकिन किसी भी कोच में टिकट जांच नहीं होती। इस स्थिति का फायदा असामाजिक तत्व खुलकर उठा रहे हैं। बिना टिकट यात्रा करने वाले लोग कोचों में कब्जा जमा लेते हैं, जिससे आरक्षित सीटों पर बैठे यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कुछ ट्रेनों में खुलेआम जुआ खेलने, शराब पीने और हंगामा करने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। यात्रियों के अनुसार रात के समय कई कोचों में कुछ लोग समूह बनाकर ताश खेलते हैं, तेज आवाज में गाली-गलौज करते हैं और शराब के नशे में अभद्र व्यवहार करते हैं। ऐसे माहौल में महिलाएं, बुजुर्ग और परिवार के साथ सफर कर रहे यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद तुरंत कोई कार्रवाई नहीं होती। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में न तो टीटी समय पर मिलते हैं और न ही सुरक्षा कर्मी नियमित गश्त करते दिखाई देते हैं। ऐसे में यदि किसी को परेशानी हो जाए या विवाद की स्थिति बन जाए तो आम यात्री खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करता है।

रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ और जीआरपी की जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि कोचों के अंदर ही खुलेआम अव्यवस्था फैल रही है तो निगरानी व्यवस्था आखिर कहां कमजोर पड़ रही है। रेलवे प्रशासन अक्सर सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी स्थिति कई बार उन दावों के विपरीत नजर आती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेनों में बढ़ती अव्यवस्था की एक बड़ी वजह कर्मचारियों की कमी और निगरानी तंत्र का कमजोर होना भी है। कई ट्रेनों में कोचों की संख्या ज्यादा होती है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या सीमित रहती है। ऐसे में पूरी ट्रेन पर प्रभावी निगरानी कर पाना कठिन हो जाता है। इसका सीधा असर यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा अनुभव पर पड़ता है।

महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता सामने आ रही है। रात के समय यदि किसी कोच में शराबी या उपद्रवी तत्व मौजूद हों तो महिलाएं भय के माहौल में सफर करने को मजबूर हो जाती हैं। कई परिवार अपने बच्चों के साथ सफर करते समय पूरी रात जागकर यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति किसी भी सभ्य और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक मानी जाएगी।

रेलवे को यह समझना होगा कि केवल आधुनिक ट्रेनें चलाना और स्टेशन विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है। यात्रियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। यदि ट्रेन के अंदर कानून व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो यात्रियों का भरोसा धीरे-धीरे टूटने लगता है।

जरूरत इस बात की है कि हर ट्रेन में टीटीई की अनिवार्य और सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की नियमित गश्त हो तथा रात के समय विशेष निगरानी रखी जाए। जिन लोगों द्वारा जुआ, शराबखोरी या हंगामा किया जाता है, उनके खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही यात्रियों की शिकायतों के लिए त्वरित सहायता प्रणाली को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

रेलवे प्रशासन को तकनीक का भी बेहतर उपयोग करना चाहिए। कोचों में सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी हेल्पलाइन और डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। यात्रियों को भी जागरूक होना होगा और किसी भी अव्यवस्था की सूचना तुरंत रेलवे हेल्पलाइन या सुरक्षा एजेंसियों को देनी चाहिए।

भारतीय रेलवे देश की पहचान और करोड़ों लोगों की जरूरत है। ऐसे में ट्रेनों को जुआ, शराबखोरी और डर के माहौल का केंद्र बनने देना बेहद खतरनाक संकेत है। यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब समय आ गया है कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए सख्त और प्रभावी कदम उठाए, ताकि हर यात्री बिना डर और परेशानी के सुरक्षित सफर कर सके।



Post a Comment

Previous Post Next Post